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इबोला वायरस ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित, भारत अलर्ट पर, इससे कांगो में 20 दिनों में 200 की मौत

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इबोला वायरस को लेकर दुनिया में फिर बढ़ी चिंता, भारत में भी सतर्कता की जरूरत

नई दिल्ली/कांगो: इबोला वायरस को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती दिख रही है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अफ्रीकी देश कांगो में इबोला संक्रमण के कारण हालात गंभीर हो गए हैं और बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई देशों में स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

इबोला एक बेहद गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। इसमें तेज बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह हवा से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए संदिग्ध मरीजों की पहचान, आइसोलेशन, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और मेडिकल निगरानी सबसे जरूरी मानी जाती है।

भारत के लिहाज से फिलहाल सबसे अहम बात सतर्कता है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री, एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और अस्पतालों की तैयारी पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है। हालांकि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि अफवाहों से बचकर आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह का पालन करना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने हाल में प्रभावित देश की यात्रा की है और उसे बुखार, उल्टी, दस्त या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपनी यात्रा की जानकारी छिपानी नहीं चाहिए।

फिलहाल इबोला को लेकर दुनिया की नजर कांगो के हालात और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के अगले कदम पर बनी हुई है। संक्रमण को शुरुआती स्तर पर रोकना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

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