
हाईकोर्ट ने बीएमसी (BMC) को साफ निर्देश दिया है कि जो भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालते हैं, उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
🔎 क्या कहा कोर्ट ने?
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कोर्ट ने कहा कि कबूतरों को दाना डालने से आसपास के लोगों की सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।
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कबूतरों की बीट और पंखों से संक्रमण फैलने का खतरा होता है।
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यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए सख्त कदम जरूरी हैं।
📝 अदालत का आदेश:
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बीएमसी ऐसे सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे जो सार्वजनिक जगहों पर कबूतरों को दाना डालते हैं।
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बीएमसी को शहर के सभी कबूतरखानों पर नियंत्रण और सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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कबूतरखानों को बंद करने के लिए कठोर कार्रवाई की जाए।
📍 क्या है मामला?
तीन याचिकाकर्ताओं – पल्लवी पाटिल, स्नेहा विसरारिया और सविता महाजन – ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि बीएमसी की कार्रवाई पशु क्रूरता अधिनियम के खिलाफ है। लेकिन कोर्ट ने इसे लोगों की सेहत से जुड़ा मसला मानते हुए जनहित में सख्त आदेश दिए।
📌 अब तक क्या-क्या बंद हुआ?
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मुंबई में 51 कबूतर खाने (दाना डालने की जगह) हैं।
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दादर का मशहूर कबूतर खाना पहले ही बंद किया जा चुका है।
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सांताक्रूज (पूर्व) और दौलत नगर, सांताक्रूज (पश्चिम) के अवैध कबूतरखाने भी बंद कर दिए गए हैं।
🏛️ महाराष्ट्र सरकार की भूमिका
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महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही बीएमसी को निर्देश दिया था कि कबूतरखानों को बंद किया जाए।
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वजह – कबूतरों की बीट से होने वाली बीमारियां और आसपास के लोगों को होने वाला खतरा।
निष्कर्ष:
अब मुंबई में कबूतरों को दाना डालना सिर्फ एक धार्मिक या दयालु कार्य नहीं रहा। यह अब कानूनी अपराध माना जाएगा, और इसके लिए एफआईआर दर्ज हो सकती है। कोर्ट और सरकार दोनों ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताया है और रोकथाम के लिए सख्ती शुरू कर दी है।
