तेहरान/लंदन – ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान की आंतरिक राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। देश के पूर्व शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा शाह पहलवी ने मौजूदा सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “ईरान की सत्ता बदलने का समय आ गया है।”
“यह जंग ईरान की नहीं, खामेनेई की है” – रजा शाह पहलवी
ब्रिटिश प्रसारक बीबीसी से बातचीत में रजा पहलवी ने स्पष्ट किया कि इस युद्ध में ईरानी जनता की मंशा शामिल नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति विशेष की सत्ता की लड़ाई है। उन्होंने कहा –
“हम 40 वर्षों से अधिक समय से ईरान में लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब बदलाव का समय है। यह संघर्ष खामेनेई के शासन का अंत कर सकता है।”
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया जिसमें उन्होंने दुनिया से अपील की कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का समर्थन करें।
“इजरायली हमले सरकार को निशाना बना रहे हैं, जनता को नहीं”
रजा पहलवी का मानना है कि इजरायल के हमलों का उद्देश्य ईरानी जनता को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि शासन की शक्ति को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि यदि इन हमलों से मौजूदा तानाशाही सत्ता कमजोर होती है, तो ईरान के भीतर लोकतांत्रिक बदलाव के रास्ते खुल सकते हैं।
तेहरान पर हमले, तेल अवीव में जवाबी कार्रवाई
इजरायली सेना ने हाल के दिनों में पश्चिमी तेहरान के सैन्य ठिकानों पर हमले तेज किए हैं। वहीं ईरान ने भी 17 जून को जवाबी कार्रवाई करते हुए तेल अवीव में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के मुख्यालय पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया।
इजरायल ने खामेनेई के करीबी सैन्य अधिकारी को किया ढेर
इजरायली वायुसेना द्वारा किए गए एक हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी मेजर जनरल अली शादमानी की मौत हो गई। वह खतम-अल-अनबिया सैन्य आपात मुख्यालय के प्रमुख थे और सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेहद करीबी माने जाते थे।
1979 की क्रांति और शाह का पतन: ऐतिहासिक संदर्भ
1979 की इस्लामी क्रांति ने ईरान की सत्ता-संरचना को पूरी तरह बदल दिया। उस समय तक देश पर शाह मोहम्मद रजा पहलवी का 26 साल लंबा शासन था। लेकिन अली खामेनेई और अयातुल्ला खोमैनी के नेतृत्व में चली क्रांति ने राजशाही को उखाड़ फेंका और धार्मिक कट्टरता पर आधारित शासन की स्थापना हुई। शाह को अंततः देश छोड़कर मिस्र में शरण लेनी पड़ी।
निष्कर्ष:
ईरान के भीतर से ही अब खामेनेई शासन के खिलाफ आवाज़ें तेज़ होने लगी हैं। रजा शाह पहलवी की यह हुंकार न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती है, बल्कि मौजूदा युद्ध के बीच ईरान की राजनीतिक अस्थिरता को भी दर्शाती है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि विचारधाराओं के स्तर पर भी लड़ा जाएगा।

