
क्यों उठाया गया यह कदम?
चिकित्सा विभाग ने निजी अस्पतालों द्वारा किए गए गलत दावों की वजह से यह फैसला लिया है। कई अस्पतालों में अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद विभाग ने AI आधारित विशेष ऑडिट सेल का गठन किया। इस सेल ने धांधली करने वाले अस्पतालों की धरपकड़ शुरू कर दी है।
इन 4 बड़ी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ:
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दस्तावेजों का दुरुपयोग – एक ही कागज का कई जगह इस्तेमाल।
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ओपीडी को गलत तरीके से आईपीडी में बदलना – बिना जरूरत मरीजों को भर्ती करना।
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बिल में गड़बड़ी – इलाज के लिए अनावश्यक रूप से अधिक बिल बनाना।
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फालतू जांचें कराना – बिना जरूरत मरीजों पर महंगी जांचें करवाना और क्लेम बढ़ाना।
कैसे हुआ खुलासा?
AI ऑडिट टीम की जांच में सामने आया कि कई निजी अस्पताल बेवजह मरीजों को भर्ती कर रहे थे और फालतू की जांचें करवा रहे थे। इससे सरकारी योजना पर अधिक खर्च हो रहा था।
गलत बिल बनाने वालों पर होगी कार्रवाई
जिन अस्पतालों में बार-बार गड़बड़ी पकड़ी गई, उन पर वसूली, निलंबन या डी-एम्पैनलमेंट (योजना से बाहर करना) जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अन्य अस्पतालों को मिली चेतावनी
चिकित्सा विभाग ने सभी निजी अस्पतालों को चेतावनी दी है कि वे RGHS योजना के नियमों का पालन करें। साथ ही, गलत पैकेज बुकिंग से बचने और दिशा-निर्देशों को अच्छी तरह समझने की सलाह दी गई है।
