अमेरिका और यूक्रेन ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य और आर्थिक सहायता प्राप्त होगी, जबकि अमेरिका को यूक्रेन के बहुमूल्य दुर्लभ खनिजों तक पहुंच मिल सकेगी।
अमेरिका को मिलेगा यूक्रेन के खनिजों का फायदा
वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद हुआ, और अब अमेरिका को यूक्रेन के खनिज संसाधनों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इसके बदले में, यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य और आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। अमेरिका ने अब तक यूक्रेन को अरबों डॉलर की सहायता दी है।
वित्त मंत्री का बयान
अमेरिका के वित्त मंत्री, स्कॉट बेसेन्ट, ने एक वीडियो पोस्ट में कहा कि “यह साझेदारी अमेरिका को यूक्रेन के साथ निवेश करने, उनके विकास संसाधनों का उपयोग करने और अमेरिका की ताकतवर पूंजी एवं शासन मानकों को लागू करने की अनुमति देती है। हम यूक्रेन के निवेश माहौल को और बेहतर बनाएंगे, जिससे आर्थिक सुधारों को गति मिलेगी।”
ट्रंप की कोशिशें जारी
यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी नीतियों के कारण युद्ध लंबा खिंच रहा है और अनगिनत निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी जिम्मेदार ठहराया है।
यूक्रेन की मंत्री का बयान
यूक्रेन की अर्थव्यवस्था मंत्री यूलिया स्विरीडेन्को ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए एक्स पर लिखा, “हम अमेरिका के साथ मिलकर एक कोष बना रहे हैं, जो हमारे देश में वैश्विक निवेश आकर्षित करेगा।” दोनों देशों के बीच समझौते के बारे में फिलहाल केवल सामान्य जानकारी ही साझा की गई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इससे यूक्रेन के खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच सुनिश्चित होगी और युद्ध में यूक्रेन को अमेरिकी सहायता जारी रहेगी।
संसद की मंजूरी जरूरी
समझौते पर अभी यूक्रेन की संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जिसके बाद यह लागू होगा। यूक्रेन के प्रधानमंत्री डेनिस श्म्यहाल ने एक टेलीविजन संदेश में कहा कि यूलिया स्विरीदेन्को वाशिंगटन पहुंच चुकी हैं और इस समझौते को अंतिम रूप देने में मदद कर रही हैं। हालांकि, अभी कुछ बाधाएं दूर करनी बाकी हैं, लेकिन इसे यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर अमेरिकी सैन्य सहायता तक पहुंच के संदर्भ में।

