वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ नीति पर बड़ी राहत मिली है। एक संघीय अपीलीय अदालत ने उनके प्रशासन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर शुल्क वसूली जारी रखने की अनुमति दे दी है। अदालत ने माना कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लागू की गई आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ वसूली को तत्काल रोका नहीं जा सकता।
नेशनल सिक्योरिटी का हवाला, याचिका मंजूर
ट्रंप प्रशासन ने “इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA), 1977” के तहत टैरिफ लगाने का फैसला किया था। जब इस फैसले को इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन बताया, तो ट्रंप टीम ने अपील दाखिल की।
सरकार की दलील थी कि टैरिफ हटाने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। फेडरल अपील कोर्ट ने इस आपात याचिका को स्वीकार कर, निचली अदालत के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी।
ट्रेड कोर्ट ने जताई थी आपत्ति, बताया था अधिकार से परे
इससे पहले तीन न्यायाधीशों की बेंच ने कहा था कि ट्रंप ने IEEPA का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने लगभग सभी देशों से होने वाले आयात पर शुल्क लगाकर राष्ट्रपति पद के अधिकारों का अतिक्रमण किया है।
यह फैसला ट्रंप की उन व्यापार नीतियों पर सीधा सवाल था जिनके कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, मंहगाई और धीमी विकास दर की आशंका बढ़ी थी।
आगे क्या?
इस निर्णय से ट्रंप को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। यदि अंतिम फैसले में ट्रंप की टैरिफ नीति को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, तो इसका असर न सिर्फ अमेरिकी व्यापार नीति, बल्कि भविष्य में राष्ट्रपति की आपात शक्तियों के उपयोग पर भी पड़ेगा।
निष्कर्ष
ट्रंप को मिली यह राहत अस्थायी है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देती है कि अमेरिका की न्यायिक प्रणाली में नेशनल सिक्योरिटी बनाम संविधानिक सीमाएं अब एक अहम बहस बन चुकी है। आगे आने वाले महीनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और नीति-निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

