जेरूसलम – एक बार फिर जेरूसलम डे के मौके पर इज़राइल के दक्षिणपंथी गुटों ने अल-अक्सा मस्जिद क्षेत्र और फिलिस्तीनी इलाकों में तनाव को हवा दे दी। सोमवार को पुराने शहर की गलियों में निकले इस मार्च के दौरान भड़काऊ नारे, तोड़फोड़ और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं दर्ज की गईं।
‘तुम्हारा गांव जल जाए’ – मुस्लिम क्वार्टर में लगे नारे
जेरूसलम के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों से गुज़रते वक्त प्रदर्शनकारियों ने ‘अरबों की मौत हो’ और ‘तुम्हारा गांव जल जाए’ जैसे आक्रामक नारे लगाए। यह मार्च उस जीत की वर्षगांठ मनाने के लिए निकाला गया, जब 1967 के युद्ध में इज़राइल ने पूर्वी जेरूसलम पर नियंत्रण स्थापित किया था।
अल-अक्सा मस्जिद में घुसकर झंडा फहराया
इस बार उग्र प्रदर्शनकारियों का समूह अल-अक्सा मस्जिद परिसर में भी दाखिल हुआ और वहां इज़राइली झंडा लहराया। यह स्थल यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों—तीनों धर्मों के लिए पवित्र माना जाता है, लेकिन यहां किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि को अंतरराष्ट्रीय समुदाय खतरनाक मानता है।
UN एजेंसी भी नहीं बची
फ्रांसीसी समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, इस मार्च में शामिल एक छोटे समूह ने, जिसमें एक इज़राइली सांसद भी शामिल था, फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA के परिसर में भी घुसपैठ की। वहां मौजूद कर्मचारियों और परिसरों की सुरक्षा को खतरा पहुंचाया गया।
पुलिस सुरक्षा में नफरत?
मार्च के लिए भारी संख्या में पुलिस और सीमा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। हालांकि आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा बलों की उपस्थिति के बावजूद, दंगों और हिंसा को रोकने में नाकामी रही। कई जगहों पर फिलिस्तीनी दुकानों में तोड़फोड़ की गई और झड़पों की भी खबर है।
हर साल दोहराई जाती है यही कहानी
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बीते वर्षों में भी जेरूसलम डे के नाम पर ऐसे ही मार्च में हिंसा और उकसावे की घटनाएं सामने आती रही हैं।
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2021 में इसी मार्च ने गाजा युद्ध को भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसमें 11 दिनों तक संघर्ष चला था।
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2023 में एक फिलिस्तीनी पत्रकार पर भी हमला किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय चुप्पी या असहायता?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बार-बार ऐसी घटनाओं की निंदा की है, लेकिन इज़राइली सरकार पर इन पर अंकुश लगाने का दबाव असर नहीं दिखा पाया है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की राजनीतिक उकसावे की गतिविधियां भविष्य में बड़े संघर्षों की वजह बन सकती हैं।
निष्कर्ष
जेरूसलम जैसे संवेदनशील शहर में जब धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बनाया जाता है, तो नतीजे सिर्फ स्थानीय तनाव नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव भी हो सकते हैं। अल-अक्सा मस्जिद पर झंडा फहराना और नफरत फैलाने वाले नारे, इस पूरे क्षेत्र में शांति और सह-अस्तित्व के प्रयासों को झटका देते हैं।

