मॉस्को: रूस ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच गुरुवार देर रात मॉस्को पहुंचे भारतीय बहुदलीय सांसद प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद रूस ने भारत को अपना “भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार” बताया। रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करने के लिए अभियान चला रहा है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्लोवेनिया की यात्रा पर रवाना होगा और उसके बाद यूनान, लातविया और स्पेन का भी दौरा करेगा।
रूस-भारत की साझेदारी बनी आतंक के खिलाफ दीवार
रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने भारतीय सांसदों से मुलाकात के बाद कहा कि रूस, आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं करेगा और इस वैश्विक खतरे के विरुद्ध भारत के साथ खड़ा रहेगा। इस दौरान भारतीय पक्ष ने रूस को हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी भी दी, जिसमें भारत ने सीमापार आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
रूस के इस रुख से आतंकवाद को शह देने वाले पाकिस्तान और चीन को गहरा झटका लगना तय है, क्योंकि दोनों देश लंबे समय से भारत की सुरक्षा चिंताओं की अनदेखी करते आए हैं।
रूसी संसद में भारतीय सांसदों का स्वागत
कनिमोई के नेतृत्व में भारतीय सांसदों ने मॉस्को में रूसी फेडरेशन एसेंबली के नेताओं से मुलाकात की। बैठक में ड्यूमा की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के अध्यक्ष लियोनिद स्लटस्की ने भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय सहयोग आतंकवाद जैसे वैश्विक खतरे के खिलाफ मजबूत मोर्चा तैयार कर रहा है।
रूसी पक्ष ने कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि भारत के साथ इस लड़ाई में रूस एकजुट है।
BRICS और SCO में भी समर्थन का वादा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि रूस ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों के लिए BRICS, SCO और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। यह संदेश स्पष्ट है कि भारत की कूटनीतिक रणनीति अब वैश्विक समर्थन जुटाने की दिशा में सफल हो रही है।
संदेश साफ: भारत अकेला नहीं है
रूस की यह घोषणा न केवल पाकिस्तान और चीन के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। भारत की आतंकवाद के विरुद्ध कूटनीति अब व्यवहारिक समर्थन में बदल रही है, और रूस इस गठबंधन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

