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आतंक को पालने वाला पाकिस्तान खुद बना निशाना, एक साल में 300 से ज्यादा हमले फिर भी नहीं सुधरी नीति

asim munir

इस्लामाबाद: जो देश सालों से आतंकवाद को परोक्ष संरक्षण देता आया है, वही आज खुद उसकी आग में जल रहा है। पाकिस्तान, जिसने आतंकियों को अपनी ज़मीन पर पनाह दी और पड़ोसी देशों में अस्थिरता फैलाने का मंच बनाया, अब खुद लगातार आतंकी हमलों का शिकार बन रहा है। लेकिन इसके बावजूद इस्लामाबाद की आंखें अभी भी बंद हैं।


खैबर पख्तूनख्वा में आतंक का तांडव

2025 की शुरुआत से अब तक पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 284 से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं। फिर भी पाकिस्तान की आतंकी संरचना — सेना, ISI और आतंकी संगठनों की मिलीभगत — जस की तस बनी हुई है। यही कारण है कि आतंकियों की संख्या में कमी के बजाय लगातार इज़ाफा हो रहा है।


CTD रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) द्वारा रविवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर वज़ीरिस्तान में सबसे अधिक 53 आतंकी घटनाएं दर्ज की गईं। बन्नू में 35, डेरा इस्माइल खान में 31, पेशावर में 13, और कुर्रम जिले में 8 हमले हुए।

इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान अपने ही घर में लगाई गई आग से जूझ रहा है, परन्तु फिर भी अपनी आतंकी नीति पर पुनर्विचार करने को तैयार नहीं है।


148 आतंकवादी ढेर, फिर भी समस्या बरकरार

सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 148 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिनमें से सबसे ज्यादा — 67 आतंकी डेरा इस्माइल खान में ढेर हुए। इस क्षेत्र को राजनीतिक रूप से अहम माना जाता है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर का गृह जिला है।

साथ ही, 1,116 संदिग्ध आतंकियों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से केवल 95 की गिरफ्तारी हो सकी है।


आतंक की जड़ें गहरी, नीतिगत बदलाव की कोई उम्मीद नहीं

यह विडंबना ही है कि जहां एक ओर पाकिस्तान को आतंकी हिंसा से भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अपनी नीतियों में बदलाव के बजाय आतंकियों को संरक्षण देने में जुटा है। सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर उठते सवालों के बावजूद पाकिस्तान आतंकी ढांचे को खत्म करने के बजाय उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छिपाने की कोशिश करता है।

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