अदालत बोली- नीति से जुड़े मामलों में सरकार को फैसला लेना है
दिल्ली हाईकोर्ट ने आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला नीतिगत फैसलों से जुड़ा है और इस पर निर्णय लेना सरकार और संबंधित एजेंसियों का कार्यक्षेत्र है।
याचिका में देश में बढ़ते आत्महत्या मामलों को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश और विशेष कदम उठाने की मांग की गई थी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने की बात भी कही गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक समस्या से निपटने के लिए सरकार पहले से कई योजनाओं और नीतियों पर काम कर रही है। अदालत ने माना कि यह विषय संवेदनशील जरूर है, लेकिन न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं भी तय हैं।
हालांकि कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि समाज और सरकार दोनों को इस दिशा में लगातार प्रयास करने की जरूरत है।

