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आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय: भाजपा ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर बोला हमला

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को लोकतंत्र का काला दिन बताते हुए मंगलवार को अलग-अलग जिलों में प्रेस वार्ता की। इस दौरान भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और कहा कि आपातकाल देश की आज़ादी और लोकतंत्र के खिलाफ सबसे बड़ा हमला था।

कोंडागांव में बोले दीपेश अरोरा:

कोंडागांव में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दीपेश अरोरा ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू कर देशवासियों के मौलिक अधिकार छीन लिए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई और हजारों निर्दोषों को जेल में डाल दिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और एक परिवार के अहंकार का परिणाम बताया।

उन्होंने आपातकाल के दौरान लड़ने वाले युवाओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए कहा कि

“मैं उन सभी को नमन करता हूँ जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई।”

सुकमा में बोले दिनेश कश्यप और सुभाऊ कश्यप:

सुकमा में भी भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता की गई।
इस दौरान पूर्व सांसद दिनेश कश्यप और पूर्व विधायक डॉ. सुभाऊ कश्यप ने कहा कि

“25 जून 1975 को देश के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ था। यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि देश की आत्मा को बचाने का संघर्ष था।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज की पीढ़ी को उन लोकतंत्र सेनानियों से सीख लेनी चाहिए जिन्होंने साहस और संकल्प से तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया।

कार्यक्रम में प्रमुख लोग रहे मौजूद:

इस मौके पर सांसद प्रतिनिधि अरुण सिंह भदौरिया, नूपुर वैदिक, रमाकांत नायक, हुंगाराम मरकाम, पार्षद रंजीत बारठ और रमेश यादव सहित कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
कार्यक्रम का समापन लोकतंत्र की रक्षा की प्रतिज्ञा के साथ हुआ और कांग्रेस की नीतियों की कड़ी आलोचना की गई।


निष्कर्ष:
भाजपा ने एक बार फिर आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उसे लोकतंत्र विरोधी कदम बताया और जनता को जागरूक रहने की अपील की।

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