
केंद्रीय आयुष, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि आयुर्वेद को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने लगी है। उन्होंने कहा कि रिसर्च, डिजिटल तकनीक, और संस्थानों के विस्तार से आयुर्वेद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा रहा है।
📌 25 देशों से हुए समझौते
प्रतापराव जाधव ने बताया कि अब तक 25 देशों के साथ आयुर्वेद को लेकर समझौते (MoU) किए जा चुके हैं। इसके अलावा 52 अन्य विदेशी संस्थानों से भी रिसर्च के लिए करार हुआ है।
📌 एम्स जैसे आयुर्वेद संस्थान
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दिल्ली के सरिता विहार में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (AIIA) खुल चुका है।
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इसका एक सैटेलाइट सेंटर गोवा में है।
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जयपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (NIA) पहले से चल रहा है।
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अब 10 और AIIA और 18 नए NIA जैसे संस्थानों की योजना पर काम हो रहा है।
📌 रिसर्च पर हो रहा बड़ा काम
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देशभर में आयुष मंत्रालय की 50 से ज्यादा रिसर्च लैब्स हैं।
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हर चिकित्सा पद्धति के लिए अलग रिसर्च काउंसिल हैं जैसे:
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आयुर्वेद के लिए – CCRAS
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यूनानी के लिए – CCRUM
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होम्योपैथी के लिए – CCRH
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इन संस्थानों के रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में भी प्रकाशित हो रहे हैं।
📌 हार्वर्ड से भी हो सकता है करार
मंत्री ने कहा कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी समेत दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से सहयोग की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिले।
📌 दवाइयों को लेकर भ्रांतियां
आयुर्वेदिक दवाओं को महंगा बताने को लेकर मंत्री ने कहा, “यह पूरी तरह गलतफहमी है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आयुर्वेद ही सबसे सस्ता और भरोसेमंद इलाज है।”
📌 आयुष डॉक्टरों को कब मिलेंगी एलोपैथी जैसी सुविधाएं?
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कई राज्यों में आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी जैसी सैलरी मिल रही है।
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कुछ राज्य नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, वहां भी सुधार के प्रयास हो रहे हैं।
📌 बीमारियां रोकने पर फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा विजन है कि “लोग बीमार ही न पड़ें।” इसके लिए:
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योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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देश का प्रकृति परीक्षण अभियान शुरू किया गया है, जिसमें हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति के अनुसार रोगों को समझने का काम हो रहा है।
✅ निष्कर्ष
प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष मंत्रालय अभी नया है, लेकिन काम की गति तेज है। रिसर्च, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संस्थागत विस्तार के जरिए आयुर्वेद को दुनिया की मुख्य चिकित्सा प्रणाली बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
