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इजराइल-ईरान संघर्ष तीसरे दिन भी जारी: अब तक का बड़ा नुकसान और ट्रंप की शांति अपील

iran-israel war

इजराइल और ईरान के बीच लगातार तीसरे दिन सैन्य संघर्ष जारी है। शुक्रवार शाम से शुरू हुई इस टकराव में दोनों देशों ने एक-दूसरे की महत्वपूर्ण सैन्य, ऊर्जा और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया है। इसके परिणामस्वरूप अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

तीसरे दिन का युद्ध परिदृश्य

रविवार शाम तक संघर्ष की तीव्रता और बढ़ गई। इजराइल की वायुसेना ने तेहरान स्थित ईरानी रक्षा मंत्रालय के परिसर समेत कई ठिकानों पर हमला किया, जिन पर उसका आरोप है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने इजराइली रक्षा कवच को चकमा देते हुए देश के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें तेल अवीव में एक सैन्य ठिकाना और हाइफा में स्थित एक गैस प्लांट शामिल हैं।

अब तक कितनी जानें गईं?

इजराइल की मैगन डेविड एडोम आपात सेवा के अनुसार, अब तक ईरान के हमलों में कम से कम 14 इजराइली नागरिकों की मौत हो चुकी है। वहीं, देश का मुख्य हवाई अड्डा और हवाई क्षेत्र तीसरे दिन भी बंद है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

ईरान की ओर से आई जानकारी के अनुसार, इजराइली हमलों में 224 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश आम नागरिक हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि करीब 1,277 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 90% से अधिक हताहत आम नागरिक हैं। इसके अलावा खबर है कि लगभग 30 ईरानी सैन्य अधिकारी और वैज्ञानिक भी हमलों में मारे गए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बढ़ते संघर्ष पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समय सीजफायर (संघर्षविराम) का है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकलेगा। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच भी तनाव को कम किया था और अब वह इस संघर्ष में भी मध्यस्थता कर सकते हैं।

ट्रंप ने यह भी कहा कि कई स्तरों पर बातचीत और राजनयिक प्रयास जारी हैं, और जल्द ही इस हिंसक संघर्ष का अंत देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह जोड़ा कि वे अक्सर बड़े काम करते हैं लेकिन उसके लिए श्रेय नहीं लेते।


निष्कर्ष:
ईरान और इजराइल के बीच जारी यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन गया है। जैसे-जैसे हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैश्विक समुदाय की नजरें इस पर टिक गई हैं कि क्या कोई शांति प्रयास रंग लाएगा या टकराव और विकराल रूप लेगा।

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