इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार एक बेहद संवेदनशील मुद्दे के चलते गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। विवाद की जड़ है सेना में भर्ती को लेकर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय, यानी हरेदी युवाओं को अब तक मिल रही विशेष छूट को समाप्त करना।
इजरायली सेना ने अब हरेदी युवाओं की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें जबरन भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे सरकार में शामिल कट्टरपंथी धार्मिक दलों, जैसे शास और यूनाइटेड टोरा जूडाइज़्म (UTJ), में भारी नाराजगी फैल गई है। इन दलों ने चेतावनी दी है कि यदि धार्मिक स्कूलों (येशिवा) के छात्रों की गिरफ्तारी बंद नहीं हुई, तो वे गठबंधन से नाता तोड़ सकते हैं—जिसका सीधा मतलब है कि नेतन्याहू की सत्ता खतरे में पड़ सकती है।
सेना की कार्रवाई और उभरा असंतोष
गाजा युद्ध के बीच पहले से ही सैनिकों की भारी कमी से जूझ रही इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने हाल में उन हरेदी युवाओं पर शिकंजा कसना शुरू किया है जो अनिवार्य सैन्य सेवा से बच रहे हैं। मिलिट्री पुलिस ने ऐसे युवाओं को उनके घरों से गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है। हालाँकि ये नियम सभी नागरिकों पर लागू हैं, धार्मिक दलों का आरोप है कि उनके समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
गठबंधन के दरकने का खतरा
शास और यूटीजे नेताओं ने दो टूक कह दिया है कि अगर जबरन गिरफ्तारियां बंद नहीं हुईं, तो वे समर्थन वापस ले लेंगे। एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कहा कि “अगर छात्रों को सेना में घसीटा गया, तो यह सरकार का आखिरी दिन होगा।” इस तनाव ने अब सेना प्रमुख एयाल ज़मीर को भी कटघरे में ला खड़ा किया है—हरेदी नेताओं ने उन पर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया है।
इस बीच, हरेदी कॉल सेंटर्स युवाओं को सैन्य सेवा से बचने के तरीके बता रहे हैं, और यरुशलम के कई अति-धार्मिक समूह सतर्क मोड में हैं।
आखिर कौन हैं हरेदी और विवाद क्यों गहराया?
1948 में इजराइल के गठन के समय, हरेदी समुदाय को उनकी धार्मिक पढ़ाई के चलते सेना से छूट दी गई थी। लेकिन 2023 में हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध ने हालात बदल दिए। जब पूरा देश युद्ध में झोंका गया, तब भी हरेदी युवाओं को छूट मिलती रही, जिससे समाज के अन्य वर्गों में गहरी नाराजगी पैदा हुई।
आज हरेदी आबादी देश की कुल जनसंख्या का करीब 14% है, जबकि 1948 में यह केवल 5% थी। प्रत्येक हरेदी परिवार में औसतन छह से अधिक बच्चे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशकों में इजराइल का हर दूसरा बच्चा हरेदी हो सकता है, जिससे यह छूट राष्ट्रीय संसाधनों पर एक बड़ा बोझ बन सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और सेना की तैयारी
जनता की नाराजगी और जनमत के दबाव के बीच इजरायली सुप्रीम कोर्ट ने हरेदी समुदाय को दी गई भर्ती छूट को रद्द कर दिया है। इसके बाद सेना ने लगभग 10,000 हरेदी युवाओं को बुलावा भेजा, लेकिन केवल गिने-चुने लोगों ने इसका जवाब दिया। नतीजा यह है कि अब मिलिट्री पुलिस को मैदान में उतरना पड़ा है—और यही स्थिति नेतन्याहू सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है।

