जेनिन/यरूशलम: वेस्ट बैंक के तनावग्रस्त जेनिन क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक उस वक्त मुश्किल में फंस गए, जब गलती से इजरायली सैन्य सीमा में प्रवेश करते ही वहां अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) द्वारा चलाई गई गोलियों के बीच राजनयिकों को अपनी जान बचाने के लिए आनन-फानन में वहां से भागना पड़ा।
यह घटना बुधवार को हुई, जब 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि वेस्ट बैंक के जेनिन शरणार्थी शिविर में मानवीय हालात का जायजा लेने पहुंचे थे। लेकिन उसी दौरान इजरायली सैनिकों और फिलिस्तीनी बंदूकधारियों के बीच भीषण संघर्ष शुरू हो गया, जिसकी चपेट में यह प्रतिनिधिमंडल भी आ गया।
वीडियो में कैद हुई भगदड़ की स्थिति
घटना के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि किस तरह से राजनयिक गोलीबारी के बीच छिपते और बचते नजर आ रहे हैं। कुछ वीडियो में IDF सैनिकों को फायरिंग करते हुए देखा गया, वहीं प्रतिनिधिमंडल के सदस्य वहां से सुरक्षित निकलने की कोशिश करते दिखे।
फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय का आरोप
फिलिस्तीनी प्रशासन ने इस गोलीबारी को “जानबूझकर की गई गैरकानूनी कार्रवाई” बताया है। उनका कहना है कि यह घटना किसी सैन्य गलती का हिस्सा नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है।
इजरायली सेना की सफाई
इजरायली रक्षा बलों ने सफाई दी है कि वे जेनिन में एक “आतंकवाद विरोधी मिशन” चला रहे थे, जिसका लक्ष्य सशस्त्र चरमपंथियों को रोकना था। हालांकि, फिलिस्तीनी पक्ष का कहना है कि इजरायली बल अत्यधिक हिंसा का प्रयोग कर रहे हैं और नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
राजनयिकों की सुरक्षा पर चिंता
यूरोपीय संघ की ओर से एक प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं मानवीय मिशनों के लिए खतरा बनती जा रही हैं और राजनयिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
भारतीय प्रतिनिधि नहीं थे मौजूद
इस प्रतिनिधिमंडल में भारत का कोई राजनयिक शामिल नहीं था। भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस मिशन में भारत की कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी। प्रतिनिधिमंडल में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा सहित करीब दो दर्जन से अधिक देशों के अधिकारी शामिल थे।
पृष्ठभूमि में बढ़ता तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब वेस्ट बैंक और गाजा क्षेत्र में हिंसा का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इस बढ़ती अस्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही गहरी चिंता जता चुका है।

