तेहरान और अन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक, ईरान के सैन्य ढांचे को भारी झटका
इजरायल द्वारा हाल में ईरान पर किए गए व्यापक सैन्य हमलों में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के शीर्ष कमांडर हुसैन सलामी और कई वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों की मृत्यु की खबरें सामने आई हैं।
इन हवाई हमलों में तेहरान समेत कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे ईरान के सुरक्षा ढांचे और परमाणु कार्यक्रम को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
प्रमुख अधिकारियों की मौत की अपुष्ट सूची
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मारे गए प्रमुख हस्तियों में शामिल हैं:
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हुसैन सलामी – कमांडर-इन-चीफ, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स
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सरदार गुलाम अली राशिद – खतम-अल-अंबिया सैन्य कमान प्रमुख
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डॉ. फरीदून अब्बासी – वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक
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डॉ. मोहम्मद तेहरांची – परमाणु अनुसंधान विशेषज्ञ
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जनरल मोहम्मद बाघेरी – ईरानी सेना प्रमुख
इन नामों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और स्थानीय चैनल्स इन घटनाओं की पुष्टि कर रहे हैं।
IRGC: ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य ताकत
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और राजनीतिक ताकत है।
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यह न केवल मिसाइल प्रोग्राम और आंतरिक सुरक्षा संभालती है, बल्कि
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सीरिया, यमन, इराक और लेबनान में ईरानी हितों की रक्षा के लिए भी सक्रिय रहती है।
हुसैन सलामी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को सीधे रिपोर्ट करते थे।
ईरान की अधिकांश गोपनीय रणनीतियों और सैन्य योजनाओं को मंजूरी उनकी टेबल से ही मिलती थी।
इजरायल ने हमले की पुष्टि की, देश में इमरजेंसी घोषित
इजरायली सेना ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के खिलाफ “पूर्वनियोजित और रणनीतिक हवाई हमले” किए हैं। इसके साथ ही इजरायल में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई है, ताकि ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से निपटा जा सके।
नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी और मिसाइल प्रोग्राम बने मुख्य टारगेट
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि:
“हमने नतांज में ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया है। इसके अलावा, हमने उन वैज्ञानिकों को भी टारगेट किया जो ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे।”
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया और कहा:
“मैं राष्ट्रपति ट्रंप और उनके नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ईरानी परमाणु खतरे से निपटने में हमारा साथ दिया।”
📌 निष्कर्ष: क्या यह टकराव अब पूर्ण युद्ध में बदल सकता है?
ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव अब केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा।
शीर्ष सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों की मौत, न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले और राष्ट्रीय आपात घोषणाओं के बीच, यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या मिडिल ईस्ट एक निर्णायक युद्ध की ओर बढ़ रहा है?

