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इजरायली हमले से ईरान की परमाणु साइट को भारी नुकसान, UN परमाणु प्रमुख की चेतावनी

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तेहरान/वियना/न्यूयॉर्क – इजराइल द्वारा ईरान की परमाणु क्षमताओं को लक्ष्य बनाकर की गई लगातार एयरस्ट्राइक्स अब वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुकी हैं।
संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने शुक्रवार को एक आपातकालीन बैठक में बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान की नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी को गंभीर नुकसान पहुंचा है।


ऊपरी ढांचा तबाह, यूरेनियम संयंत्र क्षतिग्रस्त

IAEA (इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) के प्रमुख ग्रॉसी ने बताया कि इजरायली हमले में नतांज साइट के ऊपरी हिस्से को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि वहां स्थित 60% यूरेनियम संवर्धन केंद्र और उससे जुड़े इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, जनरेटर और बैकअप सिस्टम भी इस हमले में नष्ट हो गए हैं।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमिगत सेंट्रीफ्यूज सिस्टम को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ, लेकिन बिजली की आपूर्ति ठप होने के कारण उसके संचालन पर खतरा मंडरा रहा है।


दूसरे दिन भी इजराइली एयरस्ट्राइक, ईरान ने दिया जवाब

यह हमला इजराइल के “ऑपरेशन राइजिंग लॉयन” का हिस्सा था, जो लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।
इजराइली फाइटर जेट्स और ड्रोन, जिन्हें पहले से ईरान के भीतर तैनात किया गया था, ने परमाणु ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

इस ऑपरेशन का उद्देश्य था —


ईरान का पलटवार: मिसाइलें गिरीं येरुशलम और तेल अवीव पर

हमले के जवाब में ईरान ने शुक्रवार देर रात इजराइल की ओर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं
इन मिसाइलों से तेल अवीव और येरुशलम में धमाकों की आवाजें गूंज उठीं और कई इमारतें हिल गईं।
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने इस हमले को “अनिवार्य जवाब” करार दिया और चेताया कि

“हम इजराइल को इस हमले की सजा दिए बिना चैन से नहीं बैठेंगे।”


UNSC में मचा हड़कंप, दुनिया कर रही हालात पर नजर

इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई, जहां राफेल ग्रॉसी की रिपोर्ट ने सदस्यों को चौंका दिया।
IAEA प्रमुख ने कहा कि अगर जल्द ही हालात नियंत्रित नहीं किए गए, तो परमाणु सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।


निष्कर्ष: क्या यह एक बड़ा परमाणु संकट बनता जा रहा है?

इजराइल द्वारा की गई यह सैन्य कार्रवाई केवल एक सीमित हमला नहीं, बल्कि ईरान की परमाणु क्षमता को निर्णायक रूप से पंगु बनाने की कोशिश थी।
लेकिन इस टकराव के जवाब में ईरान का पलटवार और वैश्विक संस्थाओं की चिंता इस ओर इशारा करती है कि यह विवाद अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा।

क्या अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी? या फिर यह संकट और गहराता जाएगा?

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