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ईरान-इज़राइल युद्ध पर वैश्विक प्रतिक्रिया, पुतिन के करीबी सहयोगी ने दिया अहम बयान

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ईरान और इज़राइल के बीच जारी टकराव अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व को हिला कर रख दिया है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। अब इस पर रूस की ओर से महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है।

🗣️ क्रेमलिन का रुख: इज़राइल शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रमुख प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अपने बयान में कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इज़राइल किसी मध्यस्थता या शांति प्रक्रिया में शामिल होने को इच्छुक है।

प्रेस वार्ता के दौरान पेस्कोव ने कहा:

“हम इज़राइल की ओर से फिलहाल शांति की राह अपनाने या किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार करने की कोई मंशा नहीं देख रहे हैं।”

उनसे यह पूछा गया था कि क्या इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में रूस मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है, और क्या इस दिशा में कोई प्रतिक्रिया मिली है।


🤝 रूस की पहल: मध्यस्थता के लिए तैयार

पेस्कोव ने साफ किया:

“रूस, और विशेष रूप से राष्ट्रपति पुतिन, इस बात के लिए पहले ही अपनी तत्परता जता चुके हैं कि यदि ज़रूरत पड़ी तो हम मध्यस्थता की भूमिका निभाने को तैयार हैं।”

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इज़राइल की ओर से फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


🌐 रूसी विदेश मंत्री का भी बयान

इसी बीच, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री रेतनो मार्सुडी के साथ बातचीत के दौरान इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा:

“दुनिया को ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने और एक कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए।”

लावरोव ने कहा कि इस संघर्ष को अगर समय रहते नहीं रोका गया, तो इसके गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं।


🔚 निष्कर्ष: मध्यस्थता की संभावनाएं धुंधली, संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर

जहां रूस मध्यस्थता के लिए तत्परता दिखा रहा है, वहीं इज़राइल की ओर से किसी वार्ता या समाधान की पहल नहीं दिख रही है। ऐसे में यह कहना कठिन है कि निकट भविष्य में कोई कूटनीतिक समाधान निकल सकेगा या नहीं।

इस बीच, दुनिया की नज़रें तेहरान और तेल अवीव के बीच के घटनाक्रम पर टिकी हैं — और उम्मीद की जा रही है कि कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले राजनयिक समाधान की राह खुल सके।

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