📍 तेहरान | 22 जून 2025
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने हालिया हमलों और परमाणु वार्ता की असफलता को लेकर अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कूटनीति की राह पहले इसराइल ने रोकी और फिर अमेरिका ने उसे पूरी तरह बंद कर दिया।
🛑 ‘बातचीत चल रही थी, उसी दौरान हमला हुआ’
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दिए गए अपने बयान में अराग़ची ने लिखा:
“पिछले सप्ताह हम अमेरिका के प्रतिनिधियों के साथ गंभीर परमाणु वार्ता में लगे थे, तभी इसराइल ने हमले कर यह स्पष्ट कर दिया कि वह कूटनीति को समाप्त करना चाहता है।”
“अब इस सप्ताह जब यूरोपीय संघ और कुछ यूरोपीय देशों के साथ वार्ता चल रही थी, उसी दौरान अमेरिका ने हमले कर कूटनीति का दरवाज़ा पूरी तरह बंद कर दिया।”
❓ ‘हम तो बातचीत की मेज़ पर पहले से थे’
अराग़ची ने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि जब ईरान कभी वार्ता से बाहर नहीं गया, तो उसे ‘वापस आने’ के लिए क्यों कहा जा रहा है?
“यूरोप अगर चाहता है कि ईरान बातचीत में लौटे, तो पहले ये समझना ज़रूरी है कि हम बातचीत की टेबल से कभी उठे ही नहीं। सवाल ये है कि वहां से कौन भागा?”
🧠 पृष्ठभूमि: अमेरिका 2018 में परमाणु समझौते से अलग हुआ था
ग़ौरतलब है कि 2015 में हुआ ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) उस समय बुरी तरह प्रभावित हुआ जब 2018 में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को उससे अलग कर दिया। इसके बाद से ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को धीरे-धीरे तेज़ करने की चेतावनी दी थी।
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच छठे दौर की वार्ता होनी थी, लेकिन इसराइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के कारण वह बातचीत अधर में लटक गई।
🕊️ ईरान का यह रुख़ बताता है कि वह कूटनीतिक समाधान के लिए खुले दरवाज़े छोड़ना चाहता है, लेकिन उसके मुताबिक़ सैन्य कार्रवाइयों ने उन दरवाज़ों को जबरन बंद कर दिया है।

