तेहरान/तेल अवीव – मध्य पूर्व के तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। इजराइली सैन्य ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने दुनिया का ध्यान फिर से इस संभावित युद्ध की ओर मोड़ दिया है। ईरान ने 12 घंटे के भीतर ही पलटवार करते हुए 65 मिनट तक इजराइल पर मिसाइलें बरसाईं, जिनमें से कई ने तेल अवीव में वॉर मिनिस्ट्री समेत अहम ठिकानों को निशाना बनाया।
‘सीवियर पनिशमेंट’: जवाबी ऑपरेशन का नाम
ईरानी सेना द्वारा इस हमले को “Severe Punishment” नाम दिया गया है, जो सीधे तौर पर इजराइल के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर किए गए पहले हमलों की प्रतिक्रिया है। ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार, यरुशलम और तेल अवीव में 21 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
तेल अवीव की रणनीति पर हमला
ईरान ने इस बार इजराइल के उस केंद्र को निशाना बनाया, जहाँ से युद्ध की रणनीति बनाई जाती है — वॉर मिनिस्ट्री। यही वो जगह है जहाँ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद बैठकर सैन्य ऑपरेशन की योजना बनाते हैं। ऐसे में यह हमला केवल भौतिक क्षति नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक संदेश भी है।
अमेरिका की सीधी सैन्य सक्रियता
ईरान के मिसाइल अटैक को रोकने के लिए अमेरिका ने भी तत्काल कदम उठाए। जानकारी के अनुसार, कतर में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट्स ने इजराइल के डिफेंस सिस्टम को सपोर्ट किया। वॉशिंगटन द्वारा यह हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि यह सिर्फ ईरान और इजराइल का संघर्ष नहीं, बल्कि एक बहुपक्षीय युद्ध की ओर बढ़ता संकट है।
इजराइल की चेतावनी: अब पीछे नहीं हटेंगे
इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा:
“हम ऑपरेशन राइजिंग लायन के बीच हैं। ईरान ने वर्षों से जो उत्पीड़न झेला है, उसका अंत अब करीब है। हमारे लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।”
रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि ईरान ने नागरिक क्षेत्रों पर हमला करके “लाल रेखा पार” कर दी है और अब उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ईरान की प्रतिक्रिया: ‘जायोनी शासन को नहीं बख्शेंगे’
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला जायोनी शासन के बच्चों, महिलाओं और निर्दोष नागरिकों पर हमलों का जवाब है।
इस जवाबी कार्रवाई को “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” का नाम दिया गया, जिसमें इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद एयरबेस और सैन्य ठिकानों को टारगेट किया गया।
खामेनेई की हुंकार: जीत हमारी होगी
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने अपने बयान में कहा:
“ईरानी जनता और सेना इस्लामी गणराज्य के साथ खड़ी है। हम अल्लाह की मदद से जायोनी शासन को पराजित करेंगे। यह शासन अपने कृत्यों से बच नहीं पाएगा।”
ट्रंप-नेतन्याहू की बातचीत: क्या अमेरिका और गहराई से जुड़ रहा है?
व्हाइट हाउस सूत्रों के मुताबिक, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दो दिनों में दूसरी बार फोन पर चर्चा हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की भागीदारी और भी निर्णायक हो सकती है।
निष्कर्ष: युद्ध की दहलीज पर खड़ा मिडिल ईस्ट
ईरान और इजराइल की यह टकराव अब सीमा पार कर चुका है। एक ओर परमाणु ठिकाने खतरे में हैं, दूसरी ओर नागरिक आबादी प्रभावित हो रही है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध में बदल सकता है — और दुनिया बस सांसें रोककर देख रही है।

