तेहरान/वॉशिंगटन/नई दिल्ली – ईरान और इजरायल के बीच 10 दिनों तक चले सशस्त्र संघर्ष के बाद भले ही युद्धविराम लागू हो गया हो, लेकिन ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती दे डाली है। भारत में तैनात ईरानी राजदूत इराज इलाही ने कहा है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर वह कर दिखाया है, जो दशकों में कोई देश नहीं कर सका।
“हमारे ऊपर बम बरसे, हमने भी जवाब दिया”
राजदूत इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान ने 23 जून की रात को कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाबी हमला किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद यह हमला जरूरी था। “अगर अमेरिका दोबारा हमारे खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़कर कोई कार्रवाई करता है, तो हम फिर उतनी ही ताकत से जवाब देंगे,” उन्होंने चेतावनी दी।
“इजरायल के डिफेंस सिस्टम भी नहीं रोक सके हमें”
ईरानी राजदूत ने दावा किया कि इजरायल ने ईरानी हमलों को रोकने के लिए Iron Dome समेत कई रक्षा प्रणालियां सक्रिय की थीं, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने अपने लक्ष्य साधे। उन्होंने इजरायल पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया, जिसमें “हमें अस्पतालों, रिहायशी इलाकों और एंबुलेंसों को भी नुकसान पहुंचा” जैसा गंभीर दावा शामिल था।
“ट्रंप और नेतन्याहू पर भरोसा नहीं”
राजदूत इलाही ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू जैसे नेता भरोसे के काबिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं, बल्कि वैचारिक भी है—जहां ईरान अपनी संप्रभुता और आत्मसम्मान के लिए खड़ा है।
सीजफायर पर ट्रंप का रुख
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि ईरान और इजरायल दोनों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, “दोनों देशों ने मेरे पास आकर कहा – शांति… और मैं जानता था, यही सही समय है।” ट्रंप ने चेताया कि अगर किसी ने फिर से संघर्ष का रास्ता चुना, तो बहुत कुछ दांव पर लग सकता है।
क्या यह शांति लंबे समय टिकेगी?
ईरान और अमेरिका के बीच यह वाकयुद्ध बताता है कि युद्धविराम अभी नाजुक दौर में है। जिस तरह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य और कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज कर दी है, उससे आने वाले दिनों में हालात फिर तनावपूर्ण हो सकते हैं।

