ईरान ने कट्टरपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े नौ आतंकियों को फांसी की सजा दी है। ये सभी 2018 में हुए एक हमले के बाद गिरफ्तार किए गए थे। देश की न्यायिक मीडिया इकाई मिजान न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को इस सामूहिक फांसी की पुष्टि की।
इन आतंकियों पर आरोप था कि उन्होंने अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के जवानों के साथ मुठभेड़ में हिस्सा लिया था। इस झड़प में तीन ईरानी सैनिक मारे गए थे। गिरफ्तारी के बाद कई वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें आतंकवाद, देशद्रोह और साजिश रचने जैसे गंभीर अपराधों का दोषी ठहराया गया।
ईरान में आतंकवाद से जुड़े मामलों में अक्सर कठोर दंड दिए जाते हैं, और फांसी की सजा आम है। अधिकारी इस फैसले को देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और चरमपंथी हिंसा पर रोक लगाने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
आईएस की गतिविधियां और ईरान पर असर
इस्लामिक स्टेट ने एक समय इराक और सीरिया के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर खुद को “खिलाफत” घोषित किया था। हालांकि, 2019 तक वह काफी हद तक कमजोर हो गया, लेकिन उसकी छिटपुट गतिविधियां आज भी जारी हैं।
2017 में आईएस ने तेहरान में संसद और क्रांतिकारी नेता अयातुल्ला खुमैनी के मकबरे पर बड़ा हमला किया था, जिसमें 18 लोगों की जान गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। इसके बाद से आईएस ने कई अन्य हमलों की जिम्मेदारी ली है। जनवरी 2024 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की पुण्यतिथि पर किए गए आत्मघाती हमलों में 90 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।
एक साथ फांसी क्यों दी गई?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नौ आतंकियों को एक साथ फांसी देकर ईरान सरकार ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि वह आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। साथ ही इससे चरमपंथी संगठनों के मनोबल को भी तोड़ने का प्रयास किया गया है।

