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ईरान समर्थित मिलिशिया की अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की साजिश, रिपोर्ट में दावा

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बगदाद/दमिश्क — अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान समर्थित सशस्त्र समूह, इराक और संभवतः सीरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सैन्य अधिकारियों ने ऐसे संकेत पकड़े हैं जिनसे जाहिर होता है कि ईरान-समर्थित गुट जवाबी कार्रवाई के मूड में हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किए गए हवाई हमलों के बाद अपने नागरिकों के लिए “वैश्विक सतर्कता” चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने दावा किया है कि इन हमलों से ईरान के परमाणु ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ है।

ईरान की चेतावनी: अमेरिका में ‘स्लीपर सेल्स’ सक्रिय किए जा सकते हैं

NBC न्यूज की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अमेरिका को निजी तौर पर चेताया था कि अगर तेहरान के परमाणु ठिकानों पर हमला होता है, तो वह अमेरिका की ज़मीन पर छिपे अपने ‘स्लीपर सेल्स’ को सक्रिय कर आतंकी हमले करवा सकता है। यह संदेश अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक G7 समिट के दौरान कनाडा में पहुंचाया गया था, जिसके बाद उन्होंने सम्मेलन को बीच में छोड़ दिया।

इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकाने

इराक में अमेरिका के कई प्रमुख ठिकाने हैं, जिनमें अल-असद और अर्बिल एयरबेस शामिल हैं। लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिक वहां आतंकवाद विरोधी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के तहत तैनात हैं। हालांकि, अमेरिका और बगदाद ने इन बलों की क्रमिक वापसी के लिए एक समय-सारणी तय की है।

सीरिया में भी अमेरिका के सैनिक कई ठिकानों पर तैनात हैं, जो विशेष रूप से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अभियान का हिस्सा हैं। हाल ही में पेंटागन ने घोषणा की थी कि वह वहां तैनात बलों की संख्या को घटाकर 1,000 से कम कर देगा।

ईरानी नेटवर्क कमजोर लेकिन सक्रिय

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का क्षेत्रीय नेटवर्क पिछले वर्षों में इज़राइल और अमेरिकी हमलों के कारण कमजोर हुआ है। उदाहरण के तौर पर, लेबनान आधारित हिज़्बुल्लाह, जो ईरान का प्रमुख सहयोगी रहा है, हाल की इज़राइल-हमास लड़ाई में अब तक सीधे तौर पर शामिल नहीं हुआ है।

इराकी अधिकारी भी ईरान-समर्थित गुटों को संयम बरतने के लिए मनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि अभी तक इन समूहों ने खुले तौर पर कोई हमला नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी प्रतिष्ठान सतर्क हैं।

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