
टॉप पहलवानों को हराकर जीता पदक
यह प्रतियोगिता 24 से 28 फरवरी के बीच अर्मेनिया में हुई थी। प्रियांशी ने 50 किलो वर्ग में भाग लिया और दुनिया के टॉप 3 पहलवानों को हराकर फाइनल तक पहुंचीं। उनके इस प्रदर्शन से उनकी विश्व रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ है और अब वे ए क्लास के टॉप 10 पहलवानों में दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं।
भारतीय टीम में एमपी से अकेली खिलाड़ी
इस चैंपियनशिप में भारतीय टीम में मध्यप्रदेश से प्रियांशी ही एकमात्र खिलाड़ी थीं। उनके शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जताई है और पूरी टीम को दिल्ली बुलाकर मिलने की बात कही है।
अब एशियन चैंपियनशिप की तैयारी
प्रियांशी के पिता मुकेश प्रजापति ने बताया कि सिल्वर मेडल जीतने के बाद अब वह एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल की तैयारी कर रही हैं। इससे उनके लिए 2028 ओलंपिक में खेलने का रास्ता भी खुल सकता है।
युद्ध के कारण विदेश में फंस गई थीं
चैंपियनशिप के बाद प्रियांशी को 1 मार्च को दुबई के रास्ते भारत लौटना था, लेकिन अमेरिका-इजराइल युद्ध की स्थिति के कारण उनकी वापसी में परेशानी आ गई और वे कुछ दिनों तक अर्मेनिया में फंसी रहीं।
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रियांशी से बात की और प्रयास करके उन्हें तुर्की और कजाकिस्तान के रास्ते भारत वापस लाया गया।
संघर्ष के बाद मिली सफलता
प्रियांशी ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कुश्ती में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनके पिता ने राज्य सरकार से उनके लिए प्रोत्साहन राशि देने की मांग भी की है।
प्रियांशी की इस उपलब्धि से मध्यप्रदेश और पूरे देश में खुशी का माहौल है।
