
शिकायत के बाद इस बड़े भुगतान पर रोक लगाई गई और अब केवल वास्तविक खर्च का भुगतान किया गया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि असली खर्च से कई गुना ज्यादा राशि की मांग क्यों की गई?
क्या है पूरा मामला?
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19 अक्टूबर 2024 को उपराष्ट्रपति सीकर के एक निजी शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम में आए।
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पीडब्ल्यूडी ने उनकी यात्रा की तैयारियों के लिए 21 अक्टूबर को 26.56 लाख की डिमांड भेजी, जबकि हकीकत में सिर्फ 4.63 लाख का खर्च हुआ था।
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शिकायत के बाद इस अतिरिक्त खर्च पर रोक लगा दी गई।
योजना में बदलाव की वजह से कम हुआ खर्च
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प्रशासन ने पहले कार्यक्रम स्थल के पास हेलीपेड बनाने को कहा।
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पीडब्ल्यूडी ने अस्थाई हेलीपेड और सेफ हाउस का काम शुरू किया।
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लेकिन बाद में प्रशासन ने तारपुरा हवाई पट्टी को ही इस्तेमाल करने का फैसला लिया।
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इससे अस्थाई हेलीपेड का काम बीच में ही रोक दिया गया और सिर्फ 4.63 लाख रुपए खर्च हुए।
कैसे बनाया गया 26.56 लाख का खर्च का अनुमान?
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हेलीपेड निर्माण – 10.41 लाख
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हेलीपेड व सभा स्थल सड़क – 4.46 लाख
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बेरीकेडिंग – 2.85 लाख
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सेफ हाउस – 4.48 लाख
अधिकारी का बयान
पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता रेखा जेवारिया का कहना है,
“हमें प्रशासन से सूचना मिली थी कि तारपुरा हवाई पट्टी का ही उपयोग होगा, इसलिए अस्थाई हेलीपेड का काम रोक दिया गया था। केवल जितना काम हुआ, उतने का ही भुगतान किया गया। यात्रा से पहले अनुमान के आधार पर डिमांड बनी थी, लेकिन 26 लाख की डिमांड भेजने की जानकारी मुझे नहीं है।”
