
क्यों लिया गया यह फैसला?
बगदरा अभयारण्य में 64 गांव आते हैं। यहां रहने वाले लोगों को अभयारण्य के नियमों के कारण बुनियादी सुविधाओं में दिक्कतें हो रही थीं। बताया गया कि यह जंगल एक जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग हिस्सों में फैला है और यहां वन्यजीवों की संख्या भी कम है।
इस क्षेत्र को वर्ष 1977 में काले हिरणों के संरक्षण के लिए अभयारण्य घोषित किया गया था। अब उनकी संख्या संतोषजनक मानी जा रही है, इसलिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
ओंकारेश्वर अभयारण्य का बढ़ेगा दायरा
सरकार ने यह भी तय किया है कि बगदरा अभयारण्य के बराबर क्षेत्रफल को भविष्य में बनने वाले ओंकारेश्वर और अन्य अभयारण्यों में जोड़ा जाएगा। ओंकारेश्वर अभयारण्य बनाने की प्रक्रिया पहले से चल रही है, जिसमें खंडवा और खरगोन जिले के हिस्से शामिल हैं।
अन्य अहम फैसले
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संजय टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 117.68 वर्ग किलोमीटर बढ़ाने का प्रस्ताव है।
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विस्तार से पहले यह जांच की जाएगी कि कहीं आदिवासी परिवार या गांव प्रभावित तो नहीं होंगे।
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सामान्य वन और रिजर्व क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़क और बिजली से जुड़े 12 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से 64 गांवों के विकास कार्यों को गति मिलेगी और लोगों को जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।
