
क्या है पूरा मामला?
धार जिले के बाग वन परिक्षेत्र के रेंजर वैभव उपाध्याय पर मनावर के ठेकेदार जितेन्द्र वास्कले ने रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। जितेन्द्र वास्कले को बाग रोड से पांडु गुफा तक 3 किलोमीटर सड़क बनाने का ठेका मिला था, जिसमें से 2 किलोमीटर हिस्सा वन विभाग की जमीन में आता है। इसके लिए उन्होंने विभाग से अनुमति भी ले रखी थी।
लेकिन रेंजर वैभव उपाध्याय ने काम रोक दिया और लागत का 3 प्रतिशत रिश्वत में मांग लिया। ठेकेदार पहले ही 96 हजार रुपए रिश्वत दे चुका था, फिर भी रेंजर ने 2 लाख रुपए और मांगे।
रंगे हाथों पकड़ा गया रेंजर
ठेकेदार ने इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत की। जांच के बाद शिकायत सही पाई गई। लोकायुक्त टीम ने फरियादी को 1 लाख रुपए के साथ रेंजर के पास भेजा। जैसे ही रेंजर ने पैसे लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
रेंजर वैभव उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत कार्रवाई की गई है।
नोट: लोकायुक्त की सक्रियता के बावजूद प्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
