
भिवाड़ी में एक नवंबर को AQI 313 को पार कर गया था। हालांकि, दीपावली के दो दिन बाद चार नवंबर की सुबह यह 297 पर आ गया। वहीं, अलवर में चार नवंबर को AQI 111 रहा।
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अलवर में दीपावली पर “ग्रीन पटाखे” के नाम पर हर तरह के पटाखे बेचे गए। अधिकारियों ने यह पहचानने में नाकामी दिखाई कि असल में ग्रीन पटाखे कौन से हैं। क्यूआर कोड लगाकर बेचे गए पटाखों का असली रंग तो लाल ही था, जिससे दिवाली की अगली सुबह एक नवंबर को अलवर का AQI 153 तक पहुंच गया। मोतीडूंगरी क्षेत्र का प्रदूषण स्तर इससे भी अधिक था।
भिवाड़ी का AQI एक नवंबर को 313 से ऊपर चला गया था, लेकिन चार नवंबर की सुबह यह 297 पर आ गया। अलवर का AQI चार नवंबर को 111 रहा। सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि दीपावली पर ग्रीन पटाखे जलाने के लिए केवल दो घंटे की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस आदेश के बावजूद हर तरह के पटाखे खरीदे और जलाए गए।
यह आदेश राज्य के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अंतिम समय में जारी किया गया था, जिसमें प्रदूषण के स्तर का कोई जिक्र नहीं था। अलवर का प्रदूषण स्तर पहले से ही काफी अधिक है, और यहां GRAP 1 की पाबंदियां भी लागू की गई हैं। इसके बावजूद, सरकार ने प्रदूषण बढ़ाने वाले आदेश जारी किए।
दीपावली के दौरान घरों का कचरा जलाने पर भी पाबंदी थी, लेकिन लोग इसे जलाते रहे, जिसमें नगर निगम के सफाई कर्मचारी भी शामिल थे। सरकार ने पटाखों पर दी गई दो घंटे की अनुमति का गलत फायदा उठाया। जबकि यह अनुमति रात दस बजे तक थी, युवा रात ग्यारह बजे तक जिला अस्पताल के बाहर पटाखे जलाते दिखे।
यह साफ है कि प्रदूषण को कम करने के बजाय, जिम्मेदार लोग और संस्थाएं इसे बढ़ाने में लगी हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और इस पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।
