
एसटीपी का पानी गैर-पेय कामों में होगा उपयोग
एसटीपी में सीवर के पानी को साफ करके दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाता है। अब इस साफ पानी का इस्तेमाल भवन निर्माण, कूलिंग, बागवानी, फ्लशिंग, पार्कों की सिंचाई और औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से इसकी आपूर्ति भी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भूजल पर दबाव कम होगा, जल स्रोतों का संरक्षण होगा और भूजल प्रदूषण में कमी आएगी। इसके व्यावसायिक उपयोग से पेयजल एजेंसियों की आय भी बढ़ेगी और राजस्व के नए स्रोत खुलेंगे। कृषि, उद्योग, सड़क निर्माण, स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग यूनिट, वनाग्नि नियंत्रण, सड़कों की धूल कम करने, वाहन धुलाई और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में भी यह पानी उपयोगी रहेगा।
12 शहरों में 24 घंटे पानी की आपूर्ति
कैबिनेट ने 12 शहरों में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1600 करोड़ रुपये की नई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में नई जल योजनाओं के साथ पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार भी किया जाएगा।
लाभ पाने वाले शहर हैं: श्रीनगर, गोपेश्वर, सेलाकुई, रामपुर रुड़की, ऋषिकेश पशुलोक, रानीपोखरी मौजा, रानीपोखरी ग्रांट, पाडलीगुज्जर, बागेश्वर, हल्द्वानी, भीमताल और भवाली। राज्य बेंच देहरादून में पहले की तरह ही रहेगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नई भर्ती नियमावली
करीब 25 साल बाद उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपनी भर्ती नियमावली बनेगी। कैबिनेट ने समूह ‘क’ और ‘ख’ के पदों के लिए सेवा शर्तें, नियुक्ति प्रक्रिया और पदोन्नति व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। अब तक भर्तियां उत्तर प्रदेश की नियमावली के आधार पर होती थीं।
नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। इससे योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिलेंगे और बोर्ड का प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा।
