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ओमान में ईरान-अमेरिका की परमाणु वार्ता: बढ़ेगा भरोसा या बढ़ेगा टकराव?

iran-usa

मस्कट (ओमान): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में मिले, जहां दोनों पक्षों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगभग तीन घंटे तक बातचीत हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य टकराव का खतरा मंडरा रहा है।

बंद दरवाजों के पीछे हुई अहम बातचीत

अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष माध्यमों से की गई, जिसमें तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने और तकनीकी चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अधिकारी ने कहा, “आज की बातचीत उत्साहजनक रही और अगली बैठक की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।”

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने बैठक को “कठिन मगर सार्थक” बताया और संकेत दिया कि अगले चरण की वार्ता पर अभी चर्चा चल रही है। ईरानी पक्ष ने साफ किया है कि वार्ता का उद्देश्य कूटनीतिक समाधान के लिए जमीन तैयार करना है।

वार्ता का उद्देश्य क्या है?

इस संवाद का मुख्य मकसद है – ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना, ताकि वह परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में आगे न बढ़े। इसके बदले अमेरिका, ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में कुछ नरमी कर सकता है। इससे दोनों देशों के बीच दशकों से चल रहे तनाव को कम करने की उम्मीद जताई जा रही है।

इज़राइल का विरोध और चेतावनी

इस डिप्लोमैटिक पहल के बीच इज़राइल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उसकी ओर से कहा गया है कि अगर उसे ईरान के परमाणु इरादों से खतरा महसूस हुआ, तो वह सीधे हमला करने में संकोच नहीं करेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब गाज़ा में इज़राइल-हमास संघर्ष पहले से ही गंभीर स्थिति में है।

नेतृत्व और मध्यस्थता

इस महत्वपूर्ण बैठक में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जबकि अमेरिका की ओर से पश्चिम एशियाई मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने वार्ता का नेतृत्व किया। ओमान ने इस प्रक्रिया में एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

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