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कतर की गोपनीय फंडिंग से हुआ इज़राइल पर हमला? खुफिया दस्तावेजों से बड़ा खुलासा

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इज़राइल में यहूदियों पर हुए घातक हमले के पीछे अब एक और मुस्लिम देश का नाम सामने आया है। मोसाद के एक लीक हुए खुफिया दस्तावेज से संकेत मिले हैं कि कतर ने हमास को 11 मिलियन डॉलर (लगभग 94 करोड़ रुपये) की आर्थिक मदद दी, जिसका उपयोग अक्टूबर 2023 में इज़राइल पर हुए भयावह हमले में किया गया।

कतर-हमास बैठक और आर्थिक लेन-देन

इसराइली टीवी चैनल Channel 12 की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, हमास नेताओं इस्माइल हानिया और याह्या शिनवार ने कतर के मंत्रियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इन्हीं बैठकों में फंडिंग पर सहमति बनी थी।

अब तक ईरान था शक के घेरे में, अब कतर भी

इससे पहले ईरान को हमास का मुख्य संरक्षक माना जा रहा था, लेकिन अब यह खुलासा कतर को भी संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है।

नेतन्याहू पर भी उठ रहे सवाल

इस खुलासे के राजनीतिक मायने भी गहरे हैं:

  1. इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कतर से लंबे समय से कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ता रहा है।

  2. नेतन्याहू सरकार के कुछ लोगों पर कतर से धन लेने के भी आरोप लगे हैं।

  3. हमास के साथ हुई कई वार्ताओं की मेज़बानी खुद कतर ने की है।

अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या नेतन्याहू सरकार ने जानबूझकर कतर की गतिविधियों की अनदेखी की?

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कतर अमेरिका के साथ मिलकर हमास और इज़राइल के बीच संघर्षविराम के प्रयासों में मुख्य मध्यस्थ रहा है। लेकिन अब इस रिपोर्ट के बाद:

अब आगे क्या?

फिलहाल न तो इज़राइल सरकार और न ही कतर प्रशासन ने इस रिपोर्ट पर कोई बयान दिया है।


निष्कर्ष

कतर को अब तक एक ‘न्यूट्रल’ खाड़ी राष्ट्र माना जाता रहा है। लेकिन यह रिपोर्ट अगर प्रमाणित होती है, तो इससे न केवल कतर की अंतरराष्ट्रीय साख को झटका लगेगा, बल्कि इज़राइल-गाज़ा संघर्ष के भविष्य पर भी दूरगामी असर पड़ेगा।

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