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कम खर्च में ज्यादा उपज का तरीका ‘जीवामृत’, किसानों के लिए फायदेमंद प्राकृतिक खाद

जयपुर: प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते कदमों के बीच ‘जीवामृत’ किसानों के लिए एक अच्छा और सस्ता उपाय माना जा रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है। जीवामृत एक प्राकृतिक घोल है, जो मिट्टी में अच्छे सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर जमीन को उपजाऊ बनाता है।

जीवामृत कैसे बनाएं

जीवामृत बनाने के लिए ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता। किसान इसे घर पर ही तैयार कर सकते हैं।

200 लीटर जीवामृत बनाने के लिए सामग्री:

  • 10 किलो देसी गाय का गोबर

  • 5 से 10 लीटर गोमूत्र

  • 1 से 2 किलो गुड़

  • 1 से 2 किलो बेसन

  • एक मुट्ठी खेत की मेंड़ या पीपल/बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी

  • 200 लीटर पानी

बनाने की विधि

सबसे पहले एक प्लास्टिक या सीमेंट के ड्रम में 200 लीटर पानी भर लें।
उसमें गोबर और गोमूत्र डालकर लकड़ी की मदद से अच्छी तरह मिला लें।

इसके बाद इसमें गुड़ और बेसन डालें। गुड़ सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम करता है, जिससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। बेसन इसमें प्रोटीन देता है, जिससे प्रक्रिया और तेज होती है।

अब इसमें एक मुट्ठी मिट्टी डालें। यह मिट्टी पूरे घोल में अच्छे बैक्टीरिया फैलाने का काम करती है।

मिश्रण को लकड़ी से घड़ी की दिशा में 2–3 मिनट तक चलाएं और ड्रम को जूट की बोरी से ढककर छायादार जगह पर रख दें। इसे धूप से बचाना जरूरी है।

अगले 5–7 दिनों तक सुबह और शाम इस घोल को डंडे से चलाते रहें।
गर्मियों में यह 4–5 दिन में और सर्दियों में 7–

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