
कथा स्थल पर संजय वाजपेयी, प्रेमवती मिश्रा और विक्रम राजपूत ने कलशों की स्थापना की।
कथा व्यास कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा स्वयं भगवान कृष्ण का रूप है। जब भगवान ने पृथ्वी पर अपनी लीलाएं पूरी कीं और स्वधाम जाने लगे, तब वे ज्योति रूप में श्रीमद्भागवत में विराजमान हो गए।
कथा में हरिष बाधवा, लकी साहू, प्रेमवती मिश्रा, उमा चौबे, मीना सुदीप पाण्डेय, मालती उमाहिया, अंजू चौकसे, चन्द्रा बाधवा, करण सहजल, विकास मिश्रा, गीता राजपूत, रविन्द्र अवस्थी सहित श्रीकृष्ण भक्त मंडल के कई सदस्य मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धा के साथ कथा में भाग लिया।
