
डॉ. मीणा ने साफ कहा कि अगर वे किसानों के हित में काम नहीं कर सकते, तो उनका मंत्री बने रहना बेकार है। उन्होंने कहा कि मंत्री का काम सिर्फ आराम करना नहीं है, बल्कि किसानों की समस्याओं का समाधान करना है।
किशनगढ़ में नकली खाद पर कार्रवाई
डॉ. मीणा ने सदन में बताया कि उन्होंने किशनगढ़ (अजमेर) में नकली खाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की।
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पहले अधिकारियों को जांच के लिए भेजा गया, लेकिन उन्हें सही जानकारी नहीं मिली।
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इसके बाद वे खुद मौके पर पहुंचे।
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जांच में सामने आया कि कुछ फैक्ट्रियों में मार्बल की स्लरी, मिट्टी और रंग मिलाकर नकली डीएपी खाद बनाई जा रही थी।
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16 फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकली खाद जब्त की गई।
उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे और किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
पद से ज्यादा काम जरूरी
विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब देते हुए डॉ. मीणा ने कहा कि उन्हें प्रचार का शौक नहीं है। वे केवल उस किसान के प्रति जवाबदेह हैं, जिसने उन्हें चुनकर भेजा है। उनके अनुसार, पद से ज्यादा काम और ईमानदारी महत्वपूर्ण है।
इस्तीफे पर क्या बोले?
डॉ. मीणा ने अपने पुराने इस्तीफे का जिक्र भी किया। उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने वादा किया था कि अगर उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी हारती है, तो वे इस्तीफा दे देंगे। चुनाव में हार के बाद उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसे गलत समझा, लेकिन उनका फैसला सिद्धांत और जिम्मेदारी के कारण था।
कुल मिलाकर, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने साफ किया कि उनके लिए पद से ज्यादा किसानों की सेवा और नैतिकता मायने रखती है।
