
📌 क्या है मामला?
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त्रिलोक चंद माहेश्वरी का मकान लगातार फटता जा रहा है।
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नरेंद्र शर्मा के घर में तो 3 से 5 इंच तक चौड़ी दरारें आ चुकी हैं।
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रमेश शर्मा और मधुसूदन माहेश्वरी के घर में भी कमरे की दीवारें फट रही हैं।
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लोगों का कहना है कि ये दरारें 26 अगस्त को पहली बार दिखीं, लेकिन अब हर दिन इनकी गहराई और चौड़ाई बढ़ रही है।
🌧️ बारिश के बाद शुरू हुई परेशानी
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वार्ड के लोग इसे भूगर्भीय हलचल का नतीजा मान रहे हैं।
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बताया गया कि ये प्रक्रिया बारिश के बाद शुरू हुई और अब तक रुकने का नाम नहीं ले रही।
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चंबल नदी के किनारे बसा यह वार्ड पहले से संवेदनशील माना जाता है, जिससे भू-धंसाव की आशंका भी जताई जा रही है।
🏚️ पहले भी आई थीं दरारें
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यही वार्ड 3 साल पहले भी दरारों की चपेट में आ चुका है।
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तब भी करीब आधा दर्जन मकान प्रभावित हुए थे, लेकिन जांच नहीं हुई।
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अब उन्हीं मकानों के सामने फिर से दरारें आने लगी हैं।
🛠️ जांच में क्या सामने आया?
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जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने सोमवार को मकानों की जांच करवाई।
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एक घरेलू पाइपलाइन में लीकेज मिला जिसे ठीक कर दिया गया।
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लेकिन विभाग के कनिष्ठ अभियंता पवन लोधा का कहना है कि इतनी चौड़ी दरारें सिर्फ पानी की लीकेज से नहीं आ सकतीं। इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे भूगर्भीय हलचल।
⚠️ लोग डरे हुए, प्रशासन चुप
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वार्ड में रहने वाले लोग डरे और परेशान हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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लोगों ने मांग की है कि जल्द से जल्द विस्तृत जांच करवाई जाए ताकि दरारों की असल वजह सामने आ सके।
📢 निष्कर्ष:
वार्ड नंबर 15 के लोग अपने घरों में रहकर भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द भूगर्भीय और तकनीकी जांच करवाकर लोगों को राहत दिलाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले समस्या का समाधान किया जा सके।
