कोच्चि/तिरुवनंतपुरम: केरल के तटवर्ती इलाकों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक लाइबेरिया के ध्वज वाले मालवाहक जहाज के डूबने की खबर आई। यह जहाज रविवार सुबह समुद्र में पलट गया, जिसके बाद जहाज से तेल और खतरनाक रसायनों का रिसाव शुरू हो गया। अब यह जहरीला पदार्थ तटों तक पहुंचने लगा है, जिसको लेकर राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
जहाज से रिस रहे हैं ईंधन और रसायन
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की रिपोर्ट के अनुसार, डूबे हुए जहाज के टैंकों में लगभग 84 मीट्रिक टन डीजल और 367 मीट्रिक टन फर्नेस ऑयल मौजूद था। इसके साथ ही जहाज के कुछ कंटेनरों में कैल्शियम कार्बाइड जैसा अत्यंत खतरनाक रसायन था, जो समुद्री जल से संपर्क में आने पर ज्वलनशील एसिटिलीन गैस उत्पन्न करता है। यह स्थिति पर्यावरण और तटीय आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
तटों तक बहकर पहुंचे कंटेनर, लोगों को सतर्क रहने की अपील
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान के मुताबिक, अब तक 9 कंटेनर तटों तक पहुंच चुके हैं, जिनमें से कुछ कोल्लम और अलाप्पुझा जिलों में देखे गए हैं। पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से आग्रह किया है कि वे किसी भी अज्ञात वस्तु या कंटेनर को न छुएं और कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाए रखें। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत 112 हेल्पलाइन नंबर पर देने को कहा गया है।
पर्यावरण बचाव के लिए युद्धस्तर पर अभियान
प्रदूषण फैलाव को रोकने के लिए तटरक्षक बल ने जहाजों विक्रम, सक्षम, और समर्थ को तैनात किया है। साथ ही, डोर्नियर विमान से समुद्र की सतह पर डिस्पर्सेंट पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तेल फैलाव को नियंत्रित किया जा सके। समुद्र प्रहरी नामक विशेष पोत को भी मुंबई से बुलाया जा रहा है।
मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, समुद्री क्षेत्र में विशेष चेतावनी
जहां एक ओर मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है, वहीं डूबे जहाज के स्थान से 20 समुद्री मील के दायरे में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। तटीय प्रशासनिक इकाइयों को समुद्र की निगरानी और तटों की सफाई के लिए लगातार सतर्क रखा गया है।
कंटेनरों में था बिना कस्टम क्लियरेंस का माल
मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त कार्यालय ने बताया कि जहाज पर कुल 643 कंटेनर थे, जिनमें से 13 कंटेनर में खतरनाक सामग्री मौजूद थी। इसके अलावा, जहाज पर मौजूद सभी माल पर कस्टम ड्यूटी अदा नहीं की गई थी, इसलिए किसी भी बहकर आए कंटेनर को उठाना या छूना गैरकानूनी माना जाएगा।
निष्कर्ष:
केरल के लिए यह दुर्घटना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बनकर उभरी है। जहरीले रसायनों और तेल के समुद्र में फैलाव से न केवल समुद्री जीवन बल्कि तटीय समुदायों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से हालात पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लोगों की जागरूकता और सतर्कता भी इस संकट में बेहद जरूरी है।

