
क्यों की गई कार्रवाई?
अराफात समूह ने इस जमीन पर न तो कोई उद्योग शुरू किया और न ही लीज की शर्तों का पालन किया। साथ ही श्रमिकों का भुगतान भी नहीं किया गया। इस पर केडीए ने कार्रवाई करते हुए सभी चार औद्योगिक इकाइयों और कॉलोनी की जमीन पर ‘यह सम्पत्ति कोटा विकास प्राधिकरण की है’ के बोर्ड लगाकर कब्जा जमा लिया।
कैसे हुई कार्रवाई?
सुबह 11:15 बजे भारी पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी में केडीए की टीम ने डीसीएम रोड स्थित अराफात कॉलोनी पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। कॉलोनी और फैक्टरी परिसर में जगह-जगह बोर्ड लगाए गए। कॉलोनी में मालिक और श्रमिक निवास करते हैं, इसलिए वहां कब्जा नहीं किया गया, लेकिन चारों फैक्टरी इकाइयों को ताला लगाकर सील कर दिया गया। यह प्रक्रिया दोपहर 2 बजे तक चली।
कब मिली थी लीज?
राज्य सरकार ने 2007 में अराफात ग्रुप को 7 लीज पर यह जमीन उद्योग स्थापित करने के लिए दी थी। शर्त थी कि कंपनी को एक साल के भीतर उद्योग शुरू करना होगा। लेकिन 18 साल बाद भी फैक्टरी शुरू नहीं हुई, और न ही कोई उद्योग संचालन के दस्तावेज कमेटी को दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी माना लीज में गड़बड़ी
20 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने भी अराफात ग्रुप द्वारा की गई ज़मीन के उप-विभाजन को अवैध बताया था। इसके बाद सरकार ने जनहित में लीज निरस्त करते हुए जमीन वापस लेने का निर्णय लिया।
जेके फैक्टरी का इतिहास
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स्थापना: 1960 के दशक में
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उत्पादन: सिंथेटिक फाइबर, नायलॉन, पॉलिएस्टर
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बंद हुई: 1997 में आर्थिक कारणों से
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कभी कोटा की लाइफलाइन मानी जाती थी
खास जानकारी (फैक्ट फाइल):
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फैक्टरी की कुल जमीन: 227.15 एकड़
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जमीन की अनुमानित कीमत: 2500 करोड़ रुपये
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जेके में कार्यरत श्रमिक: 4200
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श्रमिकों का बकाया: 500 करोड़ रुपये
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जारी की गई लीज़: 7
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फैक्टरी की इकाइयाँ: 4
क्या होगा अब?
फिलहाल इस जमीन का भविष्य में क्या उपयोग होगा, इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और भविष्य में उद्योग या अन्य सार्वजनिक हित में उपयोग की संभावना जताई जा रही है।
केडीए सचिव कुशल कुमार कोठारी ने कहा कि यह कार्रवाई लीज शर्तों के उल्लंघन, उद्योग न चलाने और श्रमिकों के हितों को देखते हुए जनहित में की गई है।
