
छत्तीसगढ़: एसईसीएल की अंबिका कोयला खदान में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों ने बसाहट और रोजगार की मांग को लेकर खनन कार्य रोक दिया है। प्रशासन की समझाइश के बावजूद ग्रामीण आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
रोजगार और बसाहट की मांग पर अड़े ग्रामीण
- ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन खदान में चली गई है, इसलिए उन्हें रोजगार मिलना चाहिए।
- वे चाहते हैं कि खदान प्रभावितों को रहने के लिए बसाहट की उचित व्यवस्था दी जाए।
- जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
ठेका कंपनी कर रही है काम, लेकिन ग्रामीण नाराज
- एसईसीएल ने अंबिका कोयला खदान में नया काम शुरू किया है, जिसे वर्तमान में ठेका कंपनी चला रही है।
- ग्रामीणों का विरोध कंपनी के काम के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की कोशिश नाकाम
- पाली तहसीलदार ग्रामीणों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई।
- तहसीलदार ने उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी है।
एक ही कंपनी, लेकिन अलग-अलग नियम!
- ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसईसीएल अलग-अलग खदानों में अलग पुनर्वास नीति अपना रही है।
- दीपका, कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्र में बसाहट के लिए 15 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह लाभ नहीं दिया जा रहा।
- ग्रामीणों ने सभी क्षेत्रों में एक समान पुनर्वास नीति लागू करने की मांग की है।
कंपनी ने नहीं दिया कोई जवाब
- ग्रामीणों का कहना है कि वे पांच साल से मांग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी ध्यान नहीं दे रही है।
- करतली अंबिका प्रोजेक्ट, सराईपाली (बूड़बूड़), कोरबा और रायगढ़ क्षेत्र में भी इन्हीं मांगों को लेकर आंदोलन जारी है।