बीजिंग/इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक नया मोड़ सामने आया है, जिसमें चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान से दूरी बनाते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया है। पाकिस्तान के चीनी फाइटर जेट इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल पर चीन के विदेश मंत्रालय ने ऐसी प्रतिक्रिया दी जिससे यह साफ होता है कि बीजिंग अब इस मामले से अपने को अलग दिखाना चाहता है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
बीजिंग में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से यह सवाल पूछा गया कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य तनाव में पाकिस्तान ने चीन निर्मित फाइटर जेट का उपयोग किया है—तो उनका जवाब था, “हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।“
यह प्रतिक्रिया चीन की आधिकारिक न्यूट्रल स्थिति को दर्शाती है और पाकिस्तान के दावों से बिल्कुल अलग है, जिनमें उसने हमलों में चीनी विमानों के इस्तेमाल की बात कही थी।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री का दावा
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री ने यह दावा किया था कि भारत पर किए गए हमले में चीनी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हुआ है और इस बाबत जानकारी चीन को दे दी गई है। लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय का बयान इस दावे को नकारता नजर आता है, जो पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति को और कमजोर करता है।
भारतीय वायुसेना की ताकत के आगे फेल चीन-पाकिस्तान की जोड़ी
पाकिस्तान भले ही चीन से तकनीकी मदद लेने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि भारतीय वायुसेना की ताकत और तकनीक दोनों ही मामलों में कहीं आगे है।
भारत के पास अत्याधुनिक राफेल जेट, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान हैं, जिनकी तकनीक और रणनीति ने हर बार पाकिस्तान की कोशिशों को नाकाम किया है।
तनाव क्यों बढ़ा? एक नजर घटनाक्रम पर
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22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पाक प्रायोजित आतंकवादियों ने हमला किया था।
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इस हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में स्थित 9 आतंकी अड्डों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
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जवाबी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने फिर से भारत में घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने हर मोर्चे पर उसे करारा जवाब दिया।
निष्कर्ष:
चीन के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि बीजिंग भारत-पाक तनाव से दूरी बनाए रखना चाहता है और पाकिस्तान की आक्रामक रणनीति में खुलकर साथ नहीं देना चाहता। पाकिस्तान को अब अपनी विदेश नीति और रणनीतिक साझेदारियों पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

