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क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो फिर विवादों में
रिपोर्ट्स में दावा- बिना सुनवाई 600 लोगों को दी गई मौत की सजा, फायरिंग स्क्वॉड खुद देखते थे
क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट नेता राउल कास्त्रो एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स और पुराने दस्तावेजों को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। दावा किया जा रहा है कि कास्त्रो शासन के शुरुआती दौर में सैकड़ों लोगों को बिना निष्पक्ष सुनवाई मौत की सजा दी गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 600 लोगों को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत के घाट उतारा गया। आरोप यह भी है कि इन कार्रवाइयों के दौरान राउल कास्त्रो खुद मौजूद रहते थे और गोली मारने की प्रक्रिया को देखते थे। इन दावों के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों ने फिर से पुराने मामलों की जांच की मांग उठाई है।
राउल कास्त्रो, क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं और लंबे समय तक देश की सत्ता में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे। क्यूबा की कम्युनिस्ट क्रांति के दौरान और उसके बाद कई राजनीतिक विरोधियों पर सख्त कार्रवाई की गई थी, जिसे लेकर दशकों से विवाद होता रहा है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि उस दौर में कई लोगों को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना ही सजा दी गई। हालांकि, क्यूबा सरकार और कास्त्रो समर्थक हमेशा इन आरोपों को देश की सुरक्षा और क्रांति की रक्षा से जुड़ा कदम बताते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लैटिन अमेरिकी राजनीति में कास्त्रो परिवार का प्रभाव बेहद बड़ा रहा है। लेकिन उनके शासनकाल से जुड़े मानवाधिकार मुद्दे आज भी विवाद का विषय बने हुए हैं।
सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मामले को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तानाशाही का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि उस समय देश गंभीर राजनीतिक संघर्ष और बाहरी दबावों से गुजर रहा था।
फिलहाल, इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और इतिहास के पुराने अध्याय एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।

