
क्या है मामला?
राजस्थान पत्रिका ने 16 अप्रैल को एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया कि खजवाना औषधालय में डॉक्टर बिना आए ही हाजिरी दर्ज कर रहे हैं। इस खबर के बाद जिला कलेक्टर के निर्देश पर मूण्डवा उपखंड अधिकारी लाखाराम चौधरी ने बुधवार को औषधालय का औचक निरीक्षण किया।
जांच में सामने आई लापरवाहियां
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डॉक्टर मौके पर नहीं थे।
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बिना मरीज आए ही फर्जी तरीके से ओपीडी रजिस्टर में एंट्री की गई थी।
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स्टोर में एक्सपायर्ड दवाइयां पड़ी हुई मिलीं।
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अस्पताल के कर्मचारी को धमकाने की शिकायत मिली।
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आईपीडी में एक भी मरीज का रिकॉर्ड नहीं मिला।
चौंकाने वाली बात
जांच में पता चला कि डॉक्टर नरेंद्र बुडानिया ने शुक्रवार को ही यह दर्ज कर दिया था कि शनिवार से सोमवार तक कौन-कौन मरीज आएंगे और उन्हें कौन-सी दवा देनी है। यह देखकर उपखंड अधिकारी भी हैरान रह गए।
ग्रामीणों का गुस्सा
ग्रामीण जगदीश लेगा, मनीराम मुण्डेल और रामजीवन लामरोड़ ने इस पर नाराज़गी जताते हुए औषधालय में नियमित डॉक्टर की उपस्थिति और पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है।
प्रशासन का रुख
उपखंड अधिकारी लाखाराम चौधरी ने कहा,
“निरीक्षण में कई गड़बड़ियां मिली हैं। रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और जल्द ही सुधार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।”
निष्कर्ष
यह मामला बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही कितनी जरूरी है। उम्मीद है कि प्रशासन इस पर जल्द और सख्त कार्रवाई करेगा।
