
बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेगा फायदा
माँ बीजासन मंदिर अरावली की ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। अभी तक श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती थी। रोप-वे बनने के बाद बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग श्रद्धालु आसानी से कुछ ही मिनटों में मंदिर तक पहुंच सकेंगे।
जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इस सुविधा से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय व्यापार, होटल और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण का रखा जाएगा ध्यान
मंदिर क्षेत्र रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पास स्थित है, इसलिए रोप-वे परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है।
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रोप-वे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वन्यजीव और जंगल को कम से कम नुकसान हो।
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उम्मीद है कि इन्द्रगढ़ आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।
पहले भी हो चुकी थी घोषणा
इस रोप-वे की घोषणा पहले भी की गई थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। अब फिर से परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मंदिर का इतिहास और महत्व
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माना जाता है कि यह मंदिर करीब 2000 साल पुराना है।
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मान्यता है कि संत बाबा कृपानाथ जी ने यहां तपस्या की थी और माता ने उन्हें दर्शन दिए थे।
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‘बीजासन’ नाम देवी दुर्गा के उस रूप से जुड़ा है, जिसने राक्षस रक्तबीज का वध किया था।
कहा जाता है कि इन्द्रगढ़ नगर की स्थापना के समय इस मंदिर को भव्य रूप दिया गया।
भौगोलिक स्थिति
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मंदिर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील में है।
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जयपुर से करीब 160 किमी और कोटा से लगभग 75 किमी दूर स्थित है।
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मंदिर पहाड़ी की चोटी पर प्राकृतिक गुफा में बना है।
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यहां से अरावली की सुंदर पहाड़ियों का दृश्य दिखाई देता है।
धार्मिक मान्यताएं
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यहां माँ बीजासन को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है।
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भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है।
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निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां आते हैं।
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मंदिर में 24 घंटे अखंड ज्योति जलती रहती है।
प्रमुख मेले और आयोजन
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चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां विशाल मेला लगता है।
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इन दिनों राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
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नवरात्रि में विशेष आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
रोप-वे बनने से यह प्राचीन मंदिर और अधिक श्रद्धालुओं के लिए सुलभ हो जाएगा और क्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।
