दीर अल-बलाह, गाज़ा पट्टी — गाज़ा में जारी युद्ध की भयावहता अब दुनिया की आंखें खोलने लगी है। हाल ही में अमेरिकी समाचार एजेंसी एपी (AP) ने एक रिपोर्ट में दिल दहला देने वाला दृश्य साझा किया — एक मां, असमा अल-अर्जा, अपनी ढाई साल की बेटी मायार की पतली, सूजी हुई बाहों में शर्ट डाल रही है। बच्ची भूख और कुपोषण से बेहाल है, बार-बार कराहती है और खुद को गले लगाकर सांत्वना देने की कोशिश करती है। मायार पहले भी गाज़ा के अस्पतालों में भर्ती रह चुकी है, लेकिन इस बार की 17 दिन की लंबी जद्दोजहद उसकी हालत को और भयावह बना चुकी है।
यूएन की चेतावनी और दुनिया की जागती संवेदनाएं
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय प्रमुख ने हाल में चेतावनी दी है कि अगर इज़राइल द्वारा जारी आर्थिक और खाद्य सहायता नाकेबंदी जारी रही, तो गाज़ा में 14,000 से अधिक नवजात बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। यह चेतावनी और रिपोर्टें तब सामने आई हैं जब गाज़ा में इज़राइली सैन्य कार्रवाई को डेढ़ साल से ज्यादा समय हो चुका है और इस संघर्ष में अब तक 54,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
बदलता पश्चिमी रुख
इन भयावह परिस्थितियों और रिपोर्ट्स के बाद अब कुछ पश्चिमी देशों में भी चिंता की लहर दौड़ पड़ी है। जिन देशों ने अब तक इज़राइल के पक्ष में नरम रुख अपनाया था, वे अब गाज़ा में हो रही व्यापक मानवीय त्रासदी को गंभीरता से देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इज़राइल को जवाबदेह ठहराने और उसकी नीतियों पर पुनर्विचार की मांग उठ रही है।
निष्कर्ष
गाज़ा के हालात अब केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गए हैं, बल्कि एक वैश्विक मानवीय त्रासदी का रूप ले चुके हैं। कुपोषित बच्चों की तस्वीरें और अस्पतालों में भरे हुए शव अब दुनिया के सामने ज़िंदा सबूत हैं कि यह युद्ध आम इंसान के अस्तित्व पर सीधा हमला है। सवाल यह नहीं कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि मानवता कितनी बार हारेगी?

