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गाज़ा में मानवीय सहायता के दौरान हमला, 5 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत

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दक्षिणी गाज़ा में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब आटा ले जा रहे एक मानवीय सहायता ट्रक के पास इज़रायली हमले में कम से कम पांच फिलिस्तीनी मारे गए और करीब 50 लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भारी संख्या में स्थानीय नागरिक उस ट्रक के आसपास एकत्रित थे, जो भूख से जूझ रहे लोगों के लिए खाद्य सामग्री लेकर आया था।

जबालिया शिविर में तबाही का मंजर

वहीं, जबालिया रिफ्यूजी कैंप में एक आवासीय घर पर हुई बमबारी ने हालात को और भयावह बना दिया। स्थानीय लोगों ने अल जज़ीरा को बताया कि “इज़रायली सेना बेकसूर नागरिकों की हत्या को एक सामान्य क्रिया मान चुकी है।” इस हमले में एक ही परिवार के कई सदस्य मारे गए और करीब 50 लोग या तो जान गंवा चुके हैं या मलबे में लापता हैं।


यूएन प्रमुख की कड़ी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गाज़ा में बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि यह संघर्ष अब “सबसे अधिक बर्बर चरण” में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इज़रायल केवल “एक चम्मच सहायता” पहुंचाने की अनुमति दे रहा है, जबकि उत्तरी गाज़ा में सहायता पूरी तरह अवरुद्ध है।

गुटेरेस ने कहा, “लोग भूख से मर रहे हैं, और दुनिया मूकदर्शक बनी हुई है।”


संघर्ष का मानवीय मूल्य

गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक के संघर्ष में कम से कम 53,901 लोग मारे गए हैं और 1.22 लाख से अधिक घायल हुए हैं। वहीं, गाज़ा सरकार के मीडिया कार्यालय ने यह संख्या 61,700 से अधिक बताई है। उनका कहना है कि हज़ारों लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हैं, जिनके बचने की संभावना क्षीण होती जा रही है।


संघर्ष की शुरुआत: 7 अक्टूबर की घटना

इस जंग की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई जब हमास द्वारा किए गए हमलों में 1,139 इज़राइली नागरिक मारे गए और 200 से अधिक लोगों को बंदी बना लिया गया। इस हमले के बाद इज़रायल ने गाज़ा पर ज़ोरदार सैन्य अभियान चलाया, जो अब तक थमा नहीं है।


निष्कर्ष: सहायता की लाइन में भी मौत

गाज़ा की मौजूदा स्थिति किसी मानवीय त्रासदी से कम नहीं। जहां एक ओर लोग रोटी के एक टुकड़े के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन पर हमले हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास अब यह सोचने का समय आ गया है कि क्या सिर्फ बयान जारी करने से इन निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सकती है, या ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है?

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