
पोसालिया के पास चोटीला गांव में मीणा समाज के आराध्य देव गौतम ऋषि का तीन दिवसीय वार्षिक मेला पूरे जोश और आस्था के साथ मनाया गया। सोमवार को मेले का दूसरा दिन सबसे खास रहा, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे और सुख-शांति की कामना की।
गंगा अवतरण पर पूजन और अस्थि विसर्जन
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सुबह 4:55 बजे गंगा अवतरण के समय भक्तों ने जयकारे लगाए।
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गंगा कुण्ड में पंडितों की मौजूदगी में गंगा पूजन हुआ।
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समाज के लोगों ने बीते साल दिवंगत स्वजनों की अस्थियों का विधिवत विसर्जन किया।
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महिलाओं ने मंगल गीत गाकर बाबा की स्तुति की और रंग बदलने की रस्म निभाई।
सामाजिक एकता और परंपराओं की मिसाल
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समाज के लोगों ने रिश्तेदारों और मेहमानों का भोजन, मिष्ठान्न, चूरमा और शीतल पेयों से स्वागत किया।
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शादी योग्य युवक-युवतियों के रिश्ते भी इसी मेले में तय किए गए।
छाता नृत्य और हाट बाजार बना आकर्षण
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युवाओं ने भुरिया बाबा के गीतों पर छाता नृत्य किया, जो सबका ध्यान आकर्षित करता रहा।
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मेले में 1500 से अधिक अस्थाई दुकानें लगीं, जिनमें खाद्य सामग्री, खिलौने, झूले और रोजमर्रा की चीजें शामिल थीं।
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भीड़ के चलते बाजारों में दिनभर रौनक रही।
1500 कार्यकर्ता संभाल रहे थे मेला
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समाज के 1500 कार्यकर्ता मेला प्रबंधन में जुटे रहे।
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ट्रस्ट अध्यक्ष रताराम मीणा, पंच-पटेल और युवा कार्यकर्ता दान रसीद काटते और श्रद्धालुओं का स्वागत करते नजर आए।
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मेला पूरी तरह समाज द्वारा संचालित था, पुलिस जवान सादी वर्दी में तैनात थे।
मेला क्षेत्र 3 किमी में फैला, वॉकी-टॉकी से व्यवस्था
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मेला क्षेत्र लगभग 3 किमी में फैला हुआ था।
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संचार के लिए समाज ने वॉकी-टॉकी और सीसीटीवी कैमरों का सहारा लिया।
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मोबाइल नेटवर्क नहीं होने पर भी व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
पुलिस ने संभाली सुरक्षा
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सिरोही एसपी अनिल कुमार ने बताया कि मेले में 400 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए गए।
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इनमें 67 महिला कांस्टेबल और 125 जवान सादी वर्दी में मौजूद थे।
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मेले के मार्गों पर अस्थाई चौकियां, चैकपोस्ट और इमरजेंसी यूनिट भी बनाई गई।
निष्कर्ष: गौतम ऋषि मेला आस्था, परंपरा और समाज की एकजुटता की मिसाल रहा, जिसमें हर वर्ग ने मिलकर व्यवस्था को सफल बनाया।
