
मशीनों और मजदूरों की मदद से सफाई
इस काम में जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर और ट्रेलर की मदद ली जा रही है और दर्जनों मजदूर काम में लगे हुए हैं। बबूल के पेड़ों को जड़ से उखाड़कर ट्रेलर में भरकर बाहर भेजा जा रहा है। अब तक करीब 200 बीघा भूमि को बबूल से साफ किया जा चुका है।
गौशाला के पास की भूमि से शुरुआत
गांव में कुल 600 बीघा से ज़्यादा चरागाह भूमि है, जो मेज नदी के दोनों किनारों पर फैली हुई है। शुरुआत में गौशाला के पास की ज़मीन को साफ कर पौधरोपण की तैयारी की जा रही है। जब एक तरफ की सफाई पूरी हो जाएगी, तब पौधे लगाने का काम शुरू किया जाएगा।
चरागाह की सुरक्षा के लिए तारबंदी का प्रस्ताव
चरागाह भूमि की सुरक्षा के लिए तारबंदी (फेंसिंग) जरूरी है। इसके लिए ग्राम पंचायत ने राज्य सरकार को 1 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।
प्रशासक भवानीशंकर मीना ने बताया कि पौधरोपण के लिए जगह तैयार की जा रही है और सरकार की मदद से इसे और बेहतर बनाया जाएगा।
