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चित्तौड़गढ़ कांग्रेस में गुटबाजी, पंचायत चुनाव पर पड़ सकता है असर

चित्तौड़गढ़ जिला कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। नेताओं के बीच तालमेल की कमी के कारण संगठन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। इसका असर आने वाले पंचायत और नगर परिषद चुनावों में देखने को मिल सकता है।

नेताओं में आपसी खींचतान
कांग्रेस में कई नेता अपनी-अपनी ताकत दिखाने में लगे हैं। एक पूर्व मंत्री ने अपने समर्थक को जिला अध्यक्ष बनवाया, जिससे कई पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। इसी वजह से प्रदेश स्तर से मिले निर्देशों पर भी सभी नेता एक साथ नजर नहीं आ रहे।

जिले में दो बड़े गुट
चित्तौड़गढ़ कांग्रेस में मुख्य रूप से दो गुट माने जाते हैं। एक गुट पूर्व मंत्री और निम्बाहेड़ा के पूर्व विधायक उदयलाल आंजना का है, जबकि दूसरा गुट चित्तौड़ के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत का। वर्तमान जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसौदिया आंजना गुट से जुड़े माने जाते हैं, जिससे दोनों गुटों के बीच दूरी बढ़ गई है।

विरोध कार्यक्रम में भी दिखी दूरी
प्रदेश कांग्रेस के आदेश पर मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में हुए कार्यक्रम में भी गुटबाजी साफ दिखी। इस जिला स्तरीय प्रदर्शन में कुछ ही नेता शामिल हुए। शहर और ग्रामीण क्षेत्र के ब्लॉक अध्यक्ष भी कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

वरिष्ठ नेताओं से भी तालमेल नहीं
जिला अध्यक्ष सिसौदिया की कई वरिष्ठ नेताओं से भी नहीं बन पा रही है। इसमें जाड़ावत गुट के अलावा कुछ पूर्व विधायक और पूर्व जिला अध्यक्ष भी शामिल हैं। ऐसे हालात में कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों में संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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