चित्रकूट, जो कभी दस्यु गिरोहों जैसे ददुआ, ठोकिया, बबली कोल और साधना पटेल के कारण डर और आतंक का केंद्र माना जाता था, अब विकास की नई कहानी लिख रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में यह क्षेत्र अब धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के साथ-साथ निवेश का भी केंद्र बन रहा है।
श्रीराम की प्रिय भूमि को फिर मिल रही पहचान
त्रेता युग में भगवान राम ने चित्रकूट में वनवास का लंबा समय बिताया था। तुलसीदास की रामचरितमानस में चित्रकूट की महिमा का सुंदर वर्णन है – जहां सुंदर पहाड़, पवित्र नदियां, वन, पशु-पक्षी और ऋषि-मुनियों के आश्रम हुआ करते थे। श्रीराम ने यहीं सामाजिक समरसता का संदेश दिया और भरत से मिलन भी यहीं हुआ। अब योगी सरकार चित्रकूट को उसी गौरवशाली रूप में फिर से स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
विकास की दिशा में तेजी से बढ़ता चित्रकूट
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चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद का गठन हो चुका है।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से यहाँ की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।
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बुंदेलखंड का पहला एयरपोर्ट चित्रकूट में बनकर तैयार है।
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धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राम वनगमन मार्ग पर भी काम जारी है।
पर्यटन सुविधाओं पर 50 करोड़ की मंजूरी
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हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में 50 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई।
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इसमें राम वनगमन स्थलों पर पर्यटक सुविधा केंद्र,
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एयरपोर्ट के पास देवांगना में सुविधा केंद्र,
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कामदगिरि परिक्रमा मार्ग का विकास शामिल है।
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रामघाट, मंदाकिनी नदी, तुलसीदास की जन्मस्थली, बाल्मीकि आश्रम आदि का सुंदरीकरण भी हो रहा है।
धार्मिक पर्यटन में जबरदस्त बढ़ोत्तरी
काशी और अयोध्या के बाद चित्रकूट में भी धार्मिक पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
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महाकुंभ के समय रोज़ाना 7000 तक वाहन पहुंचे।
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छुट्टियों में यह संख्या 14,000 तक जा पहुंची।
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रोपवे, घाट, नए रास्ते और आधुनिक सुविधाओं ने पर्यटकों को आकर्षित किया है।
निवेश और उद्योग का केंद्र भी बनेगा चित्रकूट
सिर्फ पर्यटन ही नहीं, योगी सरकार चित्रकूट को निवेश का हब भी बना रही है।
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प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, कौशांबी, फतेहपुर और हमीरपुर को मिलाकर
प्रयागराज-चित्रकूट विकास क्षेत्र का गठन हुआ है। -
डिफेंस कॉरिडोर के छह नोड्स में से एक नोड चित्रकूट भी है।
सड़क कनेक्टिविटी में क्रांति
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चित्रकूट लिंक एक्सप्रेस वे से चित्रकूट की कनेक्टिविटी प्रयागराज और रीवा से जुड़ रही है।
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सतना-चित्रकूट ग्रीनफील्ड हाइवे की घोषणा भी हो चुकी है।
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राम वनगमन मार्ग पर केंद्र सरकार 11000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है,
जिसका निर्माण 2026 तक पूरा हो जाएगा।
निष्कर्ष: श्रीराम की भूमि फिर से चमकने को तैयार
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चित्रकूट धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से फिर से जाग रहा है। रामायण काल की पवित्र भूमि को फिर से वैसी ही पहचान दिलाने की कोशिश जारी है। आने वाले समय में चित्रकूट सिर्फ यूपी ही नहीं, देश और दुनिया के लिए एक शानदार पर्यटन और निवेश गंतव्य बन सकता है।
