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चीन ने रूस को अपने ही हथियार बेच डाले — ‘बिज़नेस’ के नाम पर चूना?

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अगर आपने सोशल मीडिया पर वो रील देखी है जिसमें एक बच्चा कहता है “दिस इज़ बिज़नेस”, तो शायद अब उसकी असली मिसाल चीन के व्यवहार से मिल जाए। फर्क बस इतना है कि यहां ‘बच्चा’ नहीं बल्कि दुनिया की एक बड़ी ताक़त है — चीन

दोस्ती की आड़ में ‘मुनाफ़े’ का खेल

रूस और चीन लंबे समय से खुद को रणनीतिक साझेदार बताते आए हैं। युद्ध के समय, जब रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे, चीन ने दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया। लेकिन अब सामने आया है कि इस दोस्ती की आड़ में चीन ने रूस को ही धोखा दे डाला

रूसी हथियारों की नकल, फिर उसी को बेचना

एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया कि चीनी नागरिकों ने रूसी सैन्य साजो-सामान की तस्करी की। चोरी किए गए सामान — जैसे बुलेटप्रूफ जैकेट, सैन्य वर्दियाँ — को घटिया क्वालिटी में दोबारा तैयार कर रूस को ही बेच दिया गया। यही नहीं, ये वस्तुएं यूक्रेन तक पहुँचाई गईं।

चीन ने युद्ध को देखा ‘मौका’

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस को सैन्य सामान की ज़रूरत बढ़ी। चीन ने इस मौके का इस्तेमाल किया और रूसी तकनीक की नकल करके उससे सस्ते हथियार बनाए। फिर वही कॉपी किए गए हथियार रूस और यूक्रेन दोनों को बेचे गए

सीमा पार हो रही थी तस्करी

रूसी अखबार इज़वेस्टिया के अनुसार, चीनी नागरिक सीमाओं के जरिए सैन्य सामग्री रूस से चीन ले जा रहे थे। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि कुछ चीनी छात्रों के हॉस्टलों में बख्तरबंद जैकेट, बुलेट केसिंग और सैन्य प्लेट्स तक मिलीं।

नकली सामान की डिमांड और मुनाफा

RUSARM के प्रमुख रुस्लान शापिएव के अनुसार, नकली सैन्य उपकरणों की डिमांड में तेजी से इज़ाफा हुआ है। उन्होंने यह भी माना कि हथियारों की वैश्विक कीमतों में अंतर और असली सामान की कमी ने इस बाजार को जन्म दिया है।

रूस ही नहीं, यूक्रेन को भी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेनी सैनिकों के पास भी सस्ते चीनी उपकरण और वर्दियाँ देखी गई हैं, जो ये साबित करता है कि चीन ने अपने सामान से दोनों पक्षों को सप्लाई की — दोनों तरफ खेल, और हर तरफ मुनाफा

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