
कैसे हुआ हादसा?
बोड़ला नगर के लोग सुबह करीब 6 बजे कुत्तों की तेज भौंकने की आवाज सुनकर उठे। बाहर आकर देखा तो कई कुत्ते एक चीतल को घेरकर उसे नोच रहे थे। लोगों ने कुत्तों को तो भगा दिया, लेकिन तब तक चीतल की हालत बेहद खराब हो चुकी थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग को दी गई सूचना
लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। वन अमला मौके पर पहुंचा और मृत चीतल को अपने साथ ले गया। पोस्टमार्टम के बाद चीतल का अंतिम संस्कार किया गया।
हर साल दोहराई जाती है यही कहानी
यह पहली बार नहीं है। गर्मी के मौसम में हर साल ऐसे कई चीतल और अन्य जंगली जानवर पानी और सुरक्षा की तलाश में बस्ती में आ जाते हैं। वहां उन्हें कुत्ते मार डालते हैं।
अधिकारियों की लापरवाही
बोड़ला वन परिक्षेत्र में अक्सर जंगलों में आग लगती रहती है, लेकिन वन विभाग के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। आग से बचने के लिए जानवरों को मजबूरन गांवों की ओर भागना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते वन विभाग ध्यान दे, तो इन जानवरों की जान बचाई जा सकती है।
जरूरत है समाधान की
हर साल इस तरह की जानवरों की मौत चिंता का विषय है। वन विभाग को जंगल में पानी की व्यवस्था और आग पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की ज़रूरत है, ताकि मासूम जानवरों की जान बचाई जा सके।
